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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Sunday, June 11, 2017

भविष्य के ई-बैंकरों के लिए डिजिटल प्रणाली / Digital System for Future E-Bankers


दोस्तो, ०८ नोवेम्बर २०१६ से आर्थिक क्रांति का नया  दौर चल पडा है आज सभी लोग इसमे चल पडे है मगर मुझे ऐसा लागता है कि सरकार digital से एक कदम अभी भी दूर है सरकार एक ऐसा कानून ला सकती है जीससे देश का बडा फायदा होगा साथ ही साथ सरकार देश के सभी राष्ट्रीय कृत ओर निजी बँक एक हि धागे मे पिरोकर एक ऐसा software इजाद करे जीससे किसी भी भारतीय नागरिक के सभी बँक के खाते तुरंत पता चले जब भी नया खाता खोलना हो तो पहले बायोमेट्रिक मेट्रिक मशीन द्वारा आधार नंबर से पता चले कि आपके कितने बँक खाते कीस बँक मे है ये पता चल जायेगा अगर किसी का खाता किसी भी किसी राष्ट्रीय कृत बँक मे है तो उसे उस बँक में बचत खाता खोलने कि अनुमती न दी जाये चालू खाता खोलने कि अनुमती दी  जा सकती है अगर एक से ज्यादा बँक मे बचत खाते है तो किसी भी एक पसंदीदा बँक को छोडकर बाकी सभी खातो कि राशी उस खाते मे जमा कर दी जाये ओर वो सब खाते निरस्त कर दिये यदी आपका किसी भी बँक मे कोई भी बचत खाता नही है तो सिर्फ आधार कार्ड पर दिये गये नाम से आधार कार्ड से ही स्वतंत्र या संयुक्त खाता खोल जाये साथ ही साथ बँक खाते का नम्बर online तरीकेसे जैसे कि आधार कार्ड जनरेट होता है वैसे जनरेट हो सरकारी नियंत्रण के लिये ये जरुरी है देश का भला हो जाये बँक खाते के ज्यादा होने से बँक के कर्मचारी पर काम पर बोझ पडता है ये बात हमने नोट बंदी मे देखी है खाता संचालण कार्यवाही पर भी ज्यादा समय कि बरबादी होती है यदी किसी व्यक्ती के पास दो से ज्यादा बचत खाते होते है तो जाहीर है कि उस व्यक्ती कि आय आमदानी ज्यादा ही होगी जिस देश मे बँक सिर्फ एक व्यापार के नजरीयेसे देखी जाती हो वहा सिर्फ अराजकता ओर मनमानी ही हो सक्ती है मगर बँक सरकारी नियंत्रण मे एक सेवाभावी संस्था जब बनेगी तो काम का बोझ  भी कम होगा एक इन्सान एक ही बँक खाता जब रहेगा तो उसे ये भी आझादी होगी कि बँक कि सेवा से असमाधानी होकर वो अपना बँक खाता जब चाहे निशुल्क या कूछ फीस देकर दुसरी बँक मे बदल सके बँक भी ज्यादा से ज्यादा ग्राहक अपने तरफ आकर्षित करने के लिये नयी योजनाये लायेगी ओर बँक पर भी अंकुश लग जायेगा आज कम से कम २५ प्रतिशत लोगो के पास २ से ज्यादा बचत खाते लोगो के पास है देश कि सबसे बडी बँक भारतीय स्टेट बँक ऑफ इंडिया का ही अगर काम देखा जाये तो हर शाखा मे लंबी लंबी कतारे दिखाई देती है सरकार कि सभी योजनाये बँक द्वारा चलाई जाती है हर काम बँक द्वारा हो होता है ऐसे मे देश मे सरकारी बँक कि संख्या बहुत ही कम है देश मे निजी बँक काफी मात्र मे है मगर लोगो का झुकाव उनकी तरफ नही है कारण उनकी फीस ओरु तोर तरीके साथ ही साथ बँक बंद होणे कि कोई निशित्त सीमा नही होती लोग अपना पैसा भी निजी बँक मे रखना पसंद नही करते सरकारी ओर निजी क्षेत्र के सभी बँक सरकार कि निगराणी मे आ जायेंगे तो सिधा प्रभाव बँक पर पडेगा सभी बँक अपनी अपनी कार्यपद्धती से आज काम करते है मगर जब बँक सुविधा सरिकी हो जायेगी तो कर्ज के लिये हर बँक मे एक ही दर से ऋण चुकाना पडेगा साथ ही साथ बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज भी सरिका या थोडा काम ज्यादा होगा पर बँक चलाने के लिये जो मुलभूत मंत्र है कि किसी भी बँक कि तरक्की के लिये उसके द्वारा दी गई सेवा लोगो को बाटे गई कर्ज ओर वसुली अच्छी होती है तो वो बँक अच्छा बँक कहालता है यदी सरकार कूच निर्बंध लगाकर एक खाता एक बँक प्रणाली को लागू करती है तो देश के काम से कम ५ करोड से ज्यादा खाते तो बंद हो जायेंगे हर काम के लिये लोग अलग बँक खाता अलग  बँक मे खोलते है ये गलत है देश के लोगो के मन मे आज भी असुरक्षिता कि भावना है अब तो बँक ५ लेन्देन पर ५७.५० रु काट ही लेती है डिजिटल के इस युग मे आज भी लोग POS UPI या Netbanking का इस्तमाल बहुत ही कम करते नजर आते है 

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