शहरी युवको की तुलना में ग्रामीण युवक भी online कर्ज के मायाजाल मे अब धीरे धीरे फस रहे है | निजी वित्तीय कंपनियो के साथ परेशानी उठानी पड रही है |एक बार जब उधारकर्ता ने ऋण स्वीकार कर लिया, तो वसूली का कॉर्पोरेट खेल शुरू हो जाता है। बिना कागजी कार्रवाई के साथ, बिना गैरंटर पलभर में कर्ज मिल जाता है | कई लोगों ने मोबाइल ऐप की मदद से तत्काल ऑनलाइन कर्ज ले लिया। हालांकी , अब समय से पहले ही असल की ब्याज सहित वसूली धड़ल्ले से हो रही है | कर्ज लेते समय कुछ रिश्तेदारों या मित्रो के मोबाइल नंबर मांगे जाते है | जिससे की आपकी पहचान हो सके | समय रहते आपके रिश्तेदारो और दोस्तों को फोन करके ये सुनिश्चित कर लिया जाता है की आप कहा रहते है और आपका पता ठिकाना क्या है | आपके द्वारा आपके मोबाइल डाटा के उपयोग की अनुमति देने से वो लोग आपके हर हलचल पर नजर नजर रख सकते है | कर्ज लिए लोगो के बकाया कर्ज होने पर कर्जदार के संबंधियों व मित्रों को मानसिक कष्ट होने से युवक-युवतियां परेशान हो जाते हैं। निजी वित्तीय कंपनियो के साथ परेशानी उठानी पड रही है | कई लोग तो इस कारणों से डिप्रेशन में चले जाते हैं। हालांकी , वे मुंह बंद करके अपने गलती को सह रहे हैं। सभी स्तरों पर मांग की जा रही है की केंद्र सरकार ऑनलाइन कर्ज वितरण पर नकेल कसे। कोरोना की पृष्ठभूमि के साथ-साथ आर्थिक संकट में फंसे कुछ लोगों ने ऐप डाउनलोड किया, जो तत्काल कर्ज प्रदान करता है। केवल आधार कार्ड और पैन कार्ड के डेटा पर 90 से 180 दिनों के लिए 5,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का कर्ज तत्काल दिया जाता है। इसके लिए शुरू में कर्ज लेने वाले पर भरोसा किया जाता है। एक बार ऋण स्वीकृत हो जाने के बाद, इसका 35 से 40 प्रतिशत प्रसंस्करण शुल्क के रूप में काट लिया जाता है। एक बार जब कर्जदार ने कर्ज स्वीकार कर लिया, तो फिर कॉर्पोरेट खेल शुरू हो जाता है। उधारकर्ता को कंपनी से सात दिनों के भीतर कर्ज की राशी चुकाने के लिए कॉल आ जाते हैं। कर्ज नहीं चुकाने पर प्रतिदिन 150-200 रुपये अतिरिक्त ब्याज वसूला जा सकता है | फोन कॉल करके, मैसेज भेजकर कर्जदार को परेशान किया जाता है। निजी वित्तीय कंपनियो के साथ परेशानी उठानी पड रही है की न्यायालय का नोटिस देना, आपके सीबील को खराब करना या धमकी देना ऐसे हतकंडे इस्तेमाल किये जाते है। इस संकट में कर्जदार फंस गए हैं। एक कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए कुछ लोगों ने दूसरी कंपनी का एप डाउनलोड कर कर्ज लिया और इस चक्रव्यूह में फंसते गए। पुलिस के पास जाए तो पुलिस भी तुरंत कुछ नही करती | अक्सर ये भी पाया जाता है की बार बार चुकाई गई रकम की कटौती खाते से नहीं की जाती। अगर कर्ज लेने वाला मोबाइल बंद कर देता है तो भी कंपनी के पास कर्ज लेने वाले के मोबाइल का डेटा होता है। वहां से रिश्तेदारों को बारबार फोन किया जाता है | कर्जदार की रकम के बारे में सूचित किया जाता है। कहा जाता है की कर्ज चुकाने के लिए उसने आपका नंबर दिया गया है। रिश्तेदारों और दोस्तों को बेवजह मानसिक प्रताड़ना दी जाती है। ग्रामीण इलाको में कई युवा इन कंपनियों के शिकार हो रहे हैं और इस संबंध में चर्चा चल रही है। लेकिन बड़े पैमाने पर थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए कोई आगे नहीं आता। आपसे निवेदन है किसी प्रकार का मोबाइल app जो तुरंत कर्ज देता हो उसे डाउनलोड न करें आपको कितनी भी आवश्यकता हो, किसी सरकारी बैंक से कर्ज ले , लेकिन ऐसे ऑनलाइन कर्जे के शिकार न बने | यह सब निजी वित्तीय कंपनियो के साथ लोगो को परेशानी उठानी पड रही है
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