दुनिया मे वो हर इन्सान जो जन्म लेता है उसे कभी ना कभी तो मरना ही है लेकीन मरने के नाममात्र से ही डर लग जाता है जीवन तो मिथ्या है ओर मृत्यू ही जीवन का सत्य है. संसार के सभी जीव जंतू जनम लेते है जीवन जिते है ओर प्रकृती के नियमो से मर जाते है मगर इस धरा पर इन्सान ही एकमात्र जीव जनम लेता है जो अपने संसार से जाने के बाद भी अजरामर चिरंजीव होकर यादो के रूप मे सदा जीवित रह सकता है हर वो इन्सान अपने पिछे अपने कार्मो ओर यादो को छोड जा सकता है. कूछ इस तरह के काम करके एक सामान्य इन्सान भी असामान्य बनकर सालो तक अजरामर किर्ती मे अमर रह सकता है
1- हर इन्सान के शरीर मे मात्रा से ज्यादा खून भगवान ने बनाया है ओरो के काम आने के लिये ही भगवान ने इन्सान को ज्यादा मात्रा मे दिया है ओर आज तक कोई भी वैज्ञानिक खून के बदले किसी चीज को खून नही बना सका इसलिये जितना भी हो सके तो खून दान किया जाये ताकी जिस इन्सान को भी जरुरत हो वो आपके द्वारा दान किया गया खून से अपना जीवन बचा सके यही बडी इंसानियत इन्सान को बडा बनाती है इन्सान तो संसार मे मोह माया घर द्वार धन दौलत सब जमा कर लेता है मगर मृत्यू के बाद साथ कुछ भी नही जाता ये ही सत्य है महिने दो महिने मे एक बार खून दान करना शरीर के लिये भी अच्छा होता है ओर परोपकार से भी कई जाने बचाई जा सकती है बचने वाले इन्सान आपके जाने के बाद भी आपको याद करते है ओर आपका शरीर समाप्त हो जाता है मगर आप लोगो के मन मे सदा ही जीवित रह जाते है
2- हर इन्सान को अपने शरीर के जो अनमोल अंग है वो अपने मरणोपरांत दान करणे का संकल्प कर लेना चाहिये जैसे कि आपकी दो आंखे दो उन अंध लोगो को नया जीवन प्रदान करती है जो कभी शायद इस सुंदर संसार को देख ही नही सकती थी आपके द्वारा दान किये गये नेत्रो से आपके जाने के बाद भी आपके परिजन आपके जीवीत होणे का अहसास आपके नेत्रो द्वारा पा लेते है आपके इन सुंदर विचारो से आपके परिजन जीवनभर सन्मान के हकदार रहते है आपका हार्ट, किडनीया,ओर वो सभी शरीर के अंग जो दान हो सकते है उससे एक नया जीवन किसी को प्रदान कर सकते है उन अंगो का दान करना केवल आपका ही नही बल्की आपके देश का गौरव भी बढता है जिस दान से लोग अपना नया जीवन पाते है उन्हे कभी नही भूल पाते. जो इन्सान जीवन कि आखरी सांसे एक किडनी कि वजह से गिन रहा हो ओर उसे जीवन के उस समय किडनी मिल जाये तो उसका पुनर जनम ही होता है उस चीज कि अहमियत सिर्फ ओर सिर्फ वो इन्सान ओर उसके परिजन ही जानते है. जीवन का सत्य तो आखिर मृत्यू ही है ओर मृत शरीर को नस्ट करना संसार का नियम बन चुका है शरीर के सभी अंग जलाकर या किसी भी प्रकार से समाप्त कराकर हम सिर्फ परंपरा को निभाते है जो वर्षो से चली आ रही है जब तक इस संसार मे इन्सानी शरीर के अंग बनाने का कोई संशोधन नही हो जाता तबतक हजारो लोग मानव अंगो के लिये तरसते ही अपने प्राण छोडते रहेंगे
३- हर इन्सान को अपनी एक ऐसी इच्छा वसिहत के रूप मे लीखनी ही चाहिये जीससे संसार का कोई एक ऐसा काम हो जो शायद आपके जीवित रहते ना पुरा हो सकता हो जैसे के कोई नया बडा रस्ता जो आपके शहर से जाता हो या कोई बडा बांध जो जल्द बने ओर हजारो लोग सुखी समाधानी जीवन जिये या ऐसा कोई बडा देश हित मे होने वाला कोई भी काम जो सरकार या कोई संस्था करती हो जो केवल देश हित मे हो आपके सपने या आपकी आखरी इच्छा को पुरा करणे का प्रयास ही आपको नया जीवन प्रदान करता है आपके परिजन उस इच्छा को पुरी करणे के लिये काम जरूर करते है आपकी आखरी इच्छा देशहित मे होने कि वजह से लोगो का समर्थन भी मिल जाता है ओर आपके मृत्यु पश्चात भी आप सालो तक जीवित रहते है
४-हर इन्सान को अपनी कमाई का बहोत ही थोडा हिस्सा अपने मरणोपरांत जीवन के लिये बचाना चाहिये अपनी वसिहत मे इस बात का जिक्र जरूर होना चाहिये कि जो धन आपने अपने जीवन मे उस विशेष कार्य के लिये बचाया है उसे केवल अपने मरणोपरांत ही बंद किया जाये उस पुरे धन को उसी बँक मे हर वर्ष के लिये जमा करते रहे ओर उस जमा पर मिल रहे ब्याज से किसी अनाथालय या किसी पाठशाला को हमेशा आर्थिक मदत मिलती रहे इस कदम से आप मरणोपरांत भी सालो तक जीवित रह सकते है ओर किसी का जीवन भी सवार सकते है
५-हर इन्सान जिसने शिक्षा प्राप्त कि हो उस हर इन्सान का ये कर्तव्य बनता है कि मानवी शरीर के बहुमुल्य अंग जो संसार के किसी भी कारखाने मे नही बन सकते वो सिर्फ ओर सिर्फ इन्सानी शरीर से ही मिल सकते है इसलिये इन्हे समाप्त ना करणे कि लोगो को इस ज्ञान से अवगत कराये यही सच्ची शिक्षा का अर्थ होता है शरिर के अंग दान करणे पर भी शरीर का काफी बडा हिस्सा बच जाता है जो मरणोपरांत आपके धार्मिक क्रिया को पुरा के लिये काफी होता है
इस तरह आप एक शानदार मौत के मलिक हो सकते है जो मौत आपको कई सालो तक जीवित रखेगी
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