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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Friday, September 21, 2018

जुनी पेंशन वास्तव विदारक सत्य / Old pension really disgusting truth



सरकारे तो होती है  ही निडर चाहे जो कानून करे  
किसी के घर मे करे अंधेरा अपने घर मे उजाला भरे   
नवंबर ०५ से कानून बना पुरानी पेन्शन बंद करावा दी 
अपनो की झोलीया सिलवा कर अपनो  मे ही भरवा दी 
अभी तो १२ साल हो गये हजारो जिंदगीया बिखर गई 
मगरमच के आसू पालते विरोधी पार्टीया निखर गई 
वो सत्ता से विहीन हो गये जीन्होने कानून लाया था 
भरोसा भी खोया हमने जिनका साथ कभी पाया था 
राजनेता तो होते है बईमान उनसे हमदर्दी की आस करे 
व्यवस्था ऐसी बनाई की अहसान फारामोश को दास करे 
पुराने कर्मचारी बडे ताव से कहते है तुमारे साथ है 
मोर्चे मे देखता हु मे एक वाह क्या तुम्हारी बात है 
सुना था कभी साथी लोटाभर पाणी एकसाथ बहा जाते 
तो अंग्रेज १५० साल तक इस देश को लुटकर क्यो खाते 
पेन्शन मार्च का वही दौर फिर से नई रोशनी लाया है 
सेवक तो है सालो से भूखा पुराना भरपेट खाया है 
मै शर्म से कहता हु मोर्चे मे सिर्फ वही दिखते है 
गंदे राजकारण के लिये खुद को बारबार बेचते है 
धन्यवाद उनको भी देता हु जो लोकलाज को आते है 
हमे मुठीभर हमदर्दी देकर बोरी भरकर ले जाते है 
वृद्ध माई से जब मैने पुछा मोर्चे मे क्यो आती है  
माई बोली छोटी नाती मा से स्म्भली नही जाती है 
शर्म से झुक जाता है सर जो खुद को नेता कहते थे 
शांती से देते है कारण वो रोज ड्युटी मे रहते रहे थे 


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