भारत मे आज भी कृषि के संसाधनों मे कागजी कारवाई दिखाई देती है जमिन पर जमिनी हकीकत कोसो दूर है सरकार एक युरीया की बँग 298 /- रू दुकान तक पहुँच जाती है मगर किसानों को 320/- से अधिक रुपये मे मजबुरन खरीदनी पडती है शायद कभी सरकार कृषि दुकानों पर POS की सक्ती करेगी कृषि ATM कार्ड स्वाईप करनेवाले किसानों के खाते से भाव के हिसाब से ही पैसा कटेगा तब सभी किसान भाईयों के लिये बडी खुशी की बात होगी हर कृषी दुकानों मे सक्ती से पदवी धारक सहायक किसानों की मदत करेंगे तब देशहित मे कार्य होगा

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