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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Monday, August 23, 2021

दूसरो के कल्याण के बारे में सोचे तो हमारा कल्याण होता है / dusaro ke kalyan ke bare me soche to hamara kalyan hota hai

vinod dahare


साथियो हमें अपने जीवन में बहोत ज्यादा ऐसे अनुभव आते है जिनकी हम वास्तविकता में कभी कल्पना नही करते | हम जिस चीज से दूर भागने की कोशिश करते है वही चीज हमारे साथ होती है | हम अपने जीवन में जिन चीजो को ज्यादा तर नकारते है वही चीजे हमारे जीवन में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लेती है | आज आपको   कहानीयो के माध्यम से बताना चाहता हु की जब तक हम केवल अपने लिए सोचते है तब तक हमारा नुकसान ही होता है | लेकिन जब हम दूसरो के कल्याण के बारे में सोचते है तब यक़ीनन हमारा हित और कल्याण ही होता है  पहली कहानी है एक पिता और पुत्र की जिसमे ये बताया गया है की जब तक आप दूसरो के हित के बारे में काम नहीं करोगे तब तक आपका भी भला नहीं होगा | तो चलिए जानते है पहिली कहानी | एक घर में एक पिता और एक पुत्र खाना खाने के लिए टेबल पर बैठे थे | पुत्र जरा लोभी प्रवृत्ती का था | पिता को यह बात पता थी | पिता ने दो थालियो में खाना लिया | दोनों थाली में वेज बिरयानी भरी थी | एक थाली में ऊपर एक बड़ा सा पनीर का तला हुवा टुकड़ा रखा था पिता ने पूछा कोनसी थाली चाहिए बच्चे ने तुरंत पनीर के तुकडे वाली थाली ले ली | बची थाली पिता खाने लगे | पनीर का टुकड़ा देखकर बेटा बोला पिताजी मै कितना खुशनसीब हु के मुझे पनीर वाली थाली मिली | पिता बड़े ही शांत मुद्रा में खाना खा रहे थे | बेटे ने देखा पिताजी के थाली के पुलाव में दो पनीर है | लड़का लज्जित हुवा | पिता ने बड़े ही शांत स्वभाव में बच्चे को समझाया बेटा जरुरी नही होता के ऊपर दिखाई दे वही सबसे ज्यादा हो | भीतर भी ज्यादा हो सकता है | इसलिए जरा सोचकर फैसला लिया करो | दोनों ने खाना खाया | अगले दिन फिर वही दो थाली जिनमे पुलाव रखा था एक थाली पर बडासा पनीर का टुकड़ा था | पिता ने पूछा कोनसी थाली चाहिए तो बेटे ये कल की सिख याद रखी थी इसलिए उसने दूसरी थाली ले ली जिसमे पनीर का टुकड़ा दिखाई नही दे रहा था | दोनों खा रहे थे लडके ने पहले ही पूरा पुलाव छान मारा पर उसे पनीर का एक भी टुकड़ा नही मिला | वो नाराज हो गया | पिता ने फिर से उसे समझाया बेटा जरुरी नहीं होता के एक ही घटना बार बार केवल तुम्हारे लिए ही काम करे | दोनों ने खाना खाया | ऐसे ही तीसरे दिन दोनों खाना खाने टेबल पर बैठे थे दो थाली वैसे ही सजी थी एक में पनीर का टुकड़ा था और एक में नहीं था | इस बच्चे ने पिता के पूछने पर पहले आप लीजिये फिर मै लूँगा ऐसा बच्चे ने कहा | पिता ने जिस थाली में एक पनीर का टुकड़ा था वो थाली ले ली | बच्चे ने बिना पनीर वाली थाली ले ली और खाना खाने लगा | आज उसके थाली में तिन पनीर के तुकडे थे | वो बहोत ज्यादा खुश हो गया | पिता ने उसे समझाया की बेटा पहली दो बार मै तुम्हे खाने के लिए पूछता था तब तुम अपने मर्जी से चुनते थे लेकिन अब तुम पहले मेरे बारे में सोचा | इसलिए मैंने वो ही थाली चुनी जिसमे पनीर कम था | बच्चे के समझ में बात आ गई की जब तक हम केवल अपने स्वार्थ के बारे में सोचते है तब हमें केवल उतना ही मिलता है जितना हम चाहते है | लेकिन जब हम पहले दूसरो के बारे में सोचते है तब हमें उतना मिलता है जितना परमेश्वर देना चाहता है | दूसरी कहानी में जानते है एक अँधा भिखारी था रोज भीख मांगकर अपना जीवन यापन करता था उसे कोई संतान नहीं थी | अपनी पत्नी के साथ एक कुटिया में रहता था | एक दिन राजा ने देखा की भिकारी भीख मांगकर जीवन यापन कर रहा है | उसने मन में थाना की इस भिखारी को एक हिरा दिया जाये जिसे बेचकर ये आमिर हो जाये इसे मई गरीबी से मुक्त कर दूंगा | भिखारी ने राजा से हीरा लिया और घर जाने लगा | रस्ते में एक चोर ने सब देख लिया और भिकारी से हिरा चुरा लिया | अगले दिन फिर भिकारी भिख मांग रहा था रजा ने पुछा तो उसने पूरी घटना बता दी | राजा ने फिर उसे एक हिरा दिया वो भिखारी हिरा लेकर अपने घर पहोचा तो उसकी पत्नी घर पर नही थी | चोर के डर से भिखारी ने हिरा अपने घर के पुराने मटके में रख दिया | भिखारी की पत्नी नदी से मटके में पानी ला रही थी की अचानक उसके हात से मटका जमिनपर गिरा और फुट गया | वो घर आई और पुराना मटका लेकर फिर नदीपर गई | उसने जैसे ही मटका नदी में पानी भरने के लिए डुबाया वो हिरा नदी में गिरा | वो पानी भरकर घर पर आई भिखारी ने पूछा तो उसने मटका फूटने वाली घटना बताई | फिर भिखारी ने अपने नसीब को दोष देते पत्नी से कहा कल का हिरा चोर ले भागा आज का हिरा नदी में बहा | तीसरे दिन फिर से वो भिखारी भिख माँगते राजा को दिखाई पड़ा तो राजा ने पूछा पूरी हकीकत भिखारी ने राजा को बताई राजा गुस्सा हो गया | उसने भिखारी आज केवल दो सिक्के दे दिया | भिखारी ने दो सिक्के लिए और अपने नसीब को कोसते नदी पर जा पहोचा उसने देखा की एक मछवारा नदी में मछलिया पकड़ रहा है वो बड़ा परेशान था उसे दिन भरे में केवल एक ही मछली मिली थी | भिखारी ने सोचा इन दो सिक्को से मछली खरीद लेता हु और उसे जंगल के बड़े तालाब में छोड़ दूंगा | उसने दो सिक्को में वो मछली खरीद ली और अपने भिक्षापात्र में थोडा पानी में मछली लेकर जंगल की और जाने लगा | उसने देखा की मछली ने हिरा भिक्षापात्र में उगल दिया है | भिखारी बड़ा आनंदित हो गया और जोर जोर से चिल्लाने लगा मिल गया मिल गया | वही बाजू में वो चोर भी था उसे लगा भिखारी में मुझे पहचान लिया है इसलिए उसने भिखारी से माफ़ी मागी और उसका चुराया हिरा वापस कर दिया | भिखारी अब आमिर बन गया था | उसने प्रभु का धन्यवाद किया के जब तक दूसरो के बारे में हम नहीं सोचते तब क हमारा भला नही हो सकता www.vinoddahare.blogspot.com

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