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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Saturday, June 17, 2017

आपके दान से होगा भिखारीयो का सन्मान / Your donations will honor the beggars

दोस्तो हम अपने निजी जीवन मे दान के बारे मे बाते करते है या कई बार दान भी देते है मगर जो दान किसी के पेट कि भूख को शांत कर दे वो ही दान सच्चा दान होता है हम अक्सर मंदिरो की दान पेटी मे दान जमा कर देते है मगर उस दान किये पैसो का क्या होता होगा इसकी हमे कोई जानकारी नही होती कूछ लोग तो दान देने पर अपने नाम तक बडे बडे अक्षरो मे लिखवा  लेते है मगर दान देते समय हम मे हमेशा एक विश्वास होना चाहिये कि मेरे द्वारा दान किये गये पैसो से कि बेबास लाचार लोगो की भूख मिटा सके पेट कि भूक शांत करने  के लिये कितनी तकलीफे होती है ये वो ही जानता जो इस से गुजरता है दोस्तो मेरा ऐसा मानना है अगर हम किसी होटल मे ५ लोग नास्ता करणे जाते है तो ५ लोगो के लिये ४ लोगो का नास्ता ही मंगाया जाये वो भी हो सके तो एक साथ एक ही प्लेट मे मंगाया जाये ताकी एक साथ बडे ही प्रेम से खाया जा सके देखने वाले लोग भी आपके प्रेम को सलाम करेंगे ५ लोगो के लिये ४ कप चाय मंगाई जाये 1 खाली कप मे चार कपो से थोडी थोडी चाय मिलकर एक कप भर ही जाता है पैसे देते समय ५ भी लोगो के पैसे दिये जाये ताकी जिस भोजन या चाय का हमने सेवन किया नही है उसका सेवन कोई ओर भुका इन्सान जो वास्तव मे लाचार है वो करेगा उसका पेट आपके दान से भर जायेगा हमे तो सिर्फ दान करना है जो किसी के काम आ सके इसके उपलक्ष मे कई सवाल निर्माण होते है क्या वो होटल का मालिक सही मे आपके पैसे को किसी जरुरत मंद कि पेट कि आग बुझा देगा या खुद ही पैसे इस्तमाल करेगा क्या कूछ लोग तो हमेशा ऐसा ही आपके पैसे से अपनी जरुरते  पुरी करते रहेंगे काफी सवाल निर्माण होते है मगर एक दिन सभी को न्याय ओर सचाई  के मार्ग पर चलना ही पडता है एक बार दो बार चार बार बेईमानी होगी पर एक दिन सच्ची बात हर कोई मानता  है बस आप निरंतर अपने सच्ची रह पर चलते रहे ओर वो भी सचाई  के रास्ते पर चलता जरूर है हमारे द्वारा दान किये खाने से कभी किसी बेबस इन्सान जिस कि जेब कट गई हो ओर वो भुखा प्यासा जब आपकी नेकी से पेट कि आग बुझाता हो हो उसकी दुवाये आप महसूस कर कर सकते हो  जब कोई बुढा इन्सान जिसको इस संसार ने नकार दिया हो वो जब आपके दान से अपने पेट कि आग को शांत करता हो तो आप उसकी अनुभूती पा सकते है एक पागल इन्सान जिसका इस संसार मे होते हुवे भी अस्तित्व ना के बराबर होता है उसके जिने का कोई अर्थ ही नही रहता पर शरीर को पेट कि भूक मीटानी तो है ये आपका दान उसके काम आयेगा होटल मलिक को पहले ही पैसे मिले होने के कारण वो भी उस जरुरत मंद को बडे ही सन्मान से आपके द्वारा दिये गये दान कि कुपन से उसका बिल चुका कर अपना भी नुकसान नही करेगा जिसकी मनोवृत्ती नीच रहेगी वो ही इन्सान इस अच्छी पहल पर उंगली उठायेगा जो अपने निजी जीवन मे कभी कोई भलाई का या फैसला ना ले चुका होगा वो इन्सान सिर्फ ओर सिर्फ संसार ओर समाज द्वारा  नकारा ही होगा. www.vinoddahare.blogspot.com 

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