आज भी दुनिया के किसी भी देश मे देख लीजिये कि जिस देश कि प्रगती ज्यादा हो गई है उसका मुल कारण तो वहा के शिक्षक है बच्चो का भविष्य बनाने कि शक्ती सिर्फ उनही हातो मे होती है जो सदा ख़ुशी मे रहते है देश के विकास कि लिये एक शिक्षक एक सैनिक ओर एक किसान एक वैज्ञानिक का समाधानी होना जरुरी होता है सरकारे अपनी योजना के तहत काम करती है मगर जब तक एक शिक्षक को उसके काम का समाधान नही होता तबतक वह शिक्षक पूर्ण रूप से समाधानी नही होता एक सैनिक अपने कंधे पर बंदुक उठा लेता है तो रक्षा उसका धर्म होता है एक किसान खेती से जब तक अनाज ना उगाये तबतक उसे चैन नही पडता उसी तरह एक वैज्ञानिक को भी किसी खोज के लिये दिन रात एक होणे के बावजुद भी जब तक उसके मन मुताबिक परिणाम नही मिलते वो चैन नही पाता शिक्षक कि नौकरी करणे वाले इन्सान तो लाखो मिल जायेंगे पर बच्चो कि भविष्य कि चिंता मे अपना पुरा समय व्यतीत कर दे वो सच्चा शिक्षक होता है देश मे लाखो निजी विद्यालय है निजी विद्यालयो के मलिक अध्यक्ष तो इस तरीकेसे पेश आते है कि जीससे इंसानियात शर्मा जाये की विद्यालयो के शिक्षक तो इस तऱह दारे ओर सहमे रहते है कि उनको सिर्फ नौकरी ही करनी है अपना आत्मसन्मान तक उनको गवारा नही होता एक तरफ सरकारी विद्यालयो के कूछ अधिकारी ऐसे होते है जिन्हे जी हुजुरी करणे वाले शिक्षक चाहिये होते है जो शिक्षक गलत को गलत बता दे या तो उसकी बदली ऐसे इलाके मे कि जाती है या उसके लिये ही सारे कायदे ओर कानून लगाये जाते है ऐसी दुविधा जनक स्थिती मे एक शिक्षक का खुश रहना मुश्कील होता है देश के किसान को उसकी फसल कि किमत नही पाती ओर देश के सैनिक को मानसिक तनाव से निजाद ऐसे मे देश विकास कि बात देश के विकास को कम कर देती है

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