आज भी देशे मे लोग एक से बढकर एक अलिशान मकान,प्लॉट या खेती खरीद रहे है. जिसके पास बहोत ज्यादा पैसा है वो जो चाहे, जिसके चाहे नाम से, बेनामी संपत्ती की खरीद फरोख कर रहा है. किसी किसी को तो शायद अपनी कुल संपत्ती कितनी है, कहा है , ये भी ठीक से पता नही होगा. जब उसकी संपत्ती का उसे पुरा पता नही होगा तो सरकार को कैसे पता होगा ? इसलिये अब सरकार एक ऐसा कानून ओर साफ्टवेअर बनाये की किसी भी संपत्ती कि खरीद फरोख कॅश से नही होगी. सभी पैसे बँक द्वारा ही लेने देने पडेंगे. जब भी दोनो पक्ष किसी भी प्रकार की जमीन जायदात की खरीदी या बिक्री की रजीस्ट्री करने के लिये रजिस्ट्रार के पास जायेंगे तो दोनो पक्ष आधार कार्ड के माध्यम से ही रजिस्ट्री हो जायेगी. मगर उसके पहले एक ऐसा साफ्टवेअर उस कार्यालय मे आना चाहिये की जो पक्ष खरीद रहा है या बेच रहा है उसका आधार कार्ड नंबर ओर थंब ,आय वेरीफिकेशन होते ही उसके पास जितनी भी कुल संपत्ती है उसका पुरा ब्योरा दिखाई दिया जाये. ताकी उसमे अभी कि संपत्ती जोडी जाये या कम की जा सके. साथ ही साथ PAN कार्ड सक्ती से होना ही चाहिये. फिर वो रजिस्ट्री चाहे कितने भी रु की क्यो न हो. संपत्ती क्रमांक ,आधार , PAN ओर संपत्ती आपस मे लिंक हो ताकी बेनामी संपत्ती का पता चल सके. यही कानून सक्ती से दोनो पक्षो पर समान रूप से लागू किया जाये. इसके लिये हर उस सरकारी कागज के साथ आधार कार्ड लिंक करना जरुरी हो जायेगा. हर प्रापर्टी को डिजिटल नंबर देने कि जरुरत होगी. नामुमकीन तो नही. थोडा समय लगेगा. बेईमानी से जो भी धन कमा कर बेनामी संपत्तीया खरीद रहे है उनका साथ देने वाले कम बहोत कम हो जायेंगे. क्यो की किसी ओर के गलत कामो के लिये कोई स्वयं जेल नही जाना चाहता. सरकार लोगो को अपनी सम्प्त्तीया घोषित करणे के लिये एक समय सीमा तय कर दे ओर समय सीमा खतम होते ही उनका ब्योरा दे जिनके मलिक मिले ही न हो. वह संपत्ती सरकार के खाते मे जमा कर दे. इससे लोगो मे नई उर्जा का विकास होगा. सरकार के प्रती एक विश्वास भाव जाग उठेगा. सरकार को भी हजारो करोड का काला धन मिल जायेगा. कानून बनाने वाले कि नियत साफ होनी चाहिये. ज्यादा से ज्यादा संपत्ती राजनेता , बडे बडे अधिकारी , बिल्डर, अभिनेता, खुद को कहने वाले समाजसेवी , इनके पास मिल जायेगी. सबसे ज्यादा संपत्ती तो ट्रस्ट के नाम पर मिल जायेगी. कानून सब के लिये समान होना चाहिये ताकी ट्रस्ट के पदाधिकारी भी ज्यादा संपत्ती की खरीद फरोक करणे से डरेंगे क्यो की PAN कार्ड तो उनका खुद का ही होगा.
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