देश और दुनिया में सभी के जुबान से कभी न कभी हवाला, काला धन ये शब्द जरुर निकलकर बहार आ जाते है | शायद उन्हें पता भी नहीं होता की हवाला क्या है | काला धन क्या होता है ? मगर चौपाल पर बैठे बैठे कोई कह देता है अमुक अमुक नेता ने बहोत सारा काला धन हवाला के जरिये से विदेश भेज दिया | अलाना फलाना बड़े अफसर ने अपना काला धन हवाला से विदेश में किसी बैंक में जमा कर दिया | मगर हवाला कारोबार क्या है ? ये कैसे काम करता है ? कोण लोग होते है इसमे ? ये कहा कहा काम करता है | तो साथियो चलिए जानते है हवाला कारोबार क्या है | हवाला सरकार के टैक्स की चोरी करनेवाला एक अनैतिक सघटन है जो पुरे विश्व में फैला हुवा है | यदी हम अपने भारत वर्ष की बात करे तो ये पुरे देश में बड़े बड़े महानगरो में अपनी मजबूत जडे जमा चूका है | हवाला में काफी एजंट होते है | जो अपना काम पुरे विश्वास के साथ करते है | अपनी काली कमाई को सरकार से छुपाकर सरकार की टैक्स की चोरी करते है | इसका सिस्टम बहोत ही सीधा और साधा होता है | एक उदहारण के तौर पर हम थोडा समझ लेते है | यदी किसी नागपुर के व्यापारी को 50 लाख रुपये किसी व्यापार के सिलसिले में दिल्ली में अपने किसी व्यापारी मित्र को देंने है तो उसके दो तरीके होते है एक तो वो उस व्यापारी के बैंक के खाते में 50 लाख रुपये बैंक द्वारा जमा कराएगा या तो उस व्यापारी को 50 लाख रुपये कॅश ले जाकर दे देगा | बैंक द्वारा पैसे देगा तो बैंक चार्जेस के साथ बड़े व्यावहारिक लेखे बैंक द्वारा लिखित हो जायेंगे और उस पैसे पर आयकर विभाग नजर गडाए रखेगा | व्यापार तो हमेशा होता रहता है इसलिए हमेशा बैंक द्वारा पैसे भेजने पर आयकर विभाग द्वारा हमेशा हिसाब सही तरीके से रखना उन सभी व्यापारीओ की जरुरत होती है | अब आयकर विभाग और बैंक से बचने के लिए कुछ व्यापारी लोगो ने हवाला को जन्म दिया है | इसमे इस उदहारण को हम समझेंगे यदी नागपुर के व्यापारी को 50 लाख का पेमेंट दिल्ली के व्यापारी को करना है तो नागपुर का व्यापारी नागपुर के एक हवाला एजंट से संपर्क करेगा वो उसे 50 लाख रुपये कैश दे देगा और उस शहर का नाम बता देगा जिस शहर में पैसे भेजने है | वह हवाला एजंट उस व्यापारी को एक पासवर्ड दे देगा | नागपुर का हवाला एजंट दिल्ली के हवाला एजंट से संपर्क करेगा और वो पासवर्ड जो उस व्यापारी को दिया है वो ही उसे भी दे देगा | नागपुर का व्यापारी फ़ोन पर दिल्ली के व्यापारी को वो पासवर्ड बता देगा और दिल्ली का व्यापारी स्वयं या उसका कोई निजी आदमी दिल्ली के उस एजंट के पास जाकर पासवर्ड बताएगा तो वो हवाला एजंट उस व्यक्ति को अपना कमीशन काटकर बाकी रक्कम तुरंत कैश में दे देगा | इसमें दोनों व्यापारीओ की जानकारी हवाला एजंट को मालूम नही होती है | जो व्यक्ति पासवर्ड बताता है उसे पैसे मिल जाते है इसमे KYC करने की जरुरत नही होती है | अक्सर बड़े व्यापारीओ के अपने कुछ निजी विश्वासु व्यक्ति होते है जो ये कम रोजाना करते है | किसने पैसे भेजे है और किसने पैसे लिए है इसका दोनों तरफ के हवाला एजंट को पता नही होता है | केवल व्यवहार पूर्ण होने पर तसल्ली की जाती है और प्रदेश के मुखिया के पास सारा शहर का हिसाब चला जाता है | कभी कभी छोटीसी गलती हवालो कारोबारी को बहोत बड़ा नुकसान करा देती है | इसी तरह ये व्यापार अनेक सालो से चल रहा है | यह व्यापार देश के बहार कैसे चलता है ये हम जानेंगे | साथियो मान के चलते है यदी किसी सुपारी के व्यापारी के पास बहोत सारी सुपारी है और उसे सुपारी को विदेश में बेचना है | उदहारण के तौर पर यदी हमारे देश में सुपारी ५०० रूपया किलो बिकती है और वही सुपारी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ७०० रुपये किलो बिकती है तो व्यापारी चाहेगा की अन्य देश में ही उसकी ज्यादा से ज्यादा सुपारी बीके मगर देश में चीजो की कमी न हो इसलिए सरकार विदेश में भेजने वाली सुपारी की सरकारी मूल्य कीमत ८०० रुपये किलो ठहराती है | इसलिए व्यापारी अपने माल की निर्यात बिक्री रसीद तो ८०० रुपये किलो के भाव से बनाते है सरकार को उसका निर्यात मूल्य टैक्स भी उसी भाव से चुकाते है | परदेश में बैठे व्यापारी जो सुपारी खरीदते है वो भी ८०० रुपये के भाव पर ही उस व्यापारी को बैंक द्वारा पैसे भी भेजते है | मगर जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने पर दुसरे देश के व्यापारी ज्यादा भाव से माल इसी लिए खरीदते है की हवाला कारोबार के जरिये जो एक किलो पर १०० रूपया ज्यादा मिला था उसे तुरंत उस विदेशी व्यापारी को लौटा दिया जाता है | ईमानदारी से व्यापार न करने पर ऐसे हवाला के काम व्यापारी करते है जब की एक किलो पर उस व्यापारी को देश में बिकने वाली सुपारी के बदले २०० रुपये प्रति किलो ज्यादा मिल चुके है | साथियो हवाला का काम ज्यादा से ज्यादा बड़े व्यापारी जिसमें किराना माल व्यापारी , ज्वेलर्स , लैंड डेवेलपर्स और बड़े ट्रांसपोर्टस करते है | दिन भर आने वाले कॅश को अपने ही शहर में लेन देन इनका प्रतिरूप बैंक जैसा होता है | इससे देश को काफी बड़ी मात्रा नुकसान होता है | आयकर विभाग के साथ प्रवर्तन निदेशालय ( ED) भी नजर रखे होती है मगर ये काम बड़े ही शातिर तरीके से हवाला एजंट करते है | हर राज्य में इनके एक बड़े एजंट होते है उनके हाथ के निचे हर शहर में एक दो या जरुरत के हिसाब से एजंट होते है | कई सालो से इनका ये व्यापार बहोत ही फल फुल रहा है | हवाला के कारोबार में काले पैसे का ज्यादातर हिस्सा होता है | काला पैसा क्या होता है ? साथियो काला और गोरा पैसा नहीं होता | पैसा तो आखिर पैसा होता है | लेकिन सरकार ने हर व्यापार के लेन देन पर अपना टैक्स लेना होता है जिससे सरकार जनहित के कम कर सके मगर कुछ व्यापारी सरकार को टैक्स नही देते और जमा पैसे का हिसाब भी नहीं देते उस पैसे या कमाई को काला पैसा, काला धन कहा गया है | हम सभी ने ये सुना है की विश्व की एक ऐसी बैंक है जहा विश्व का सारा काला पैसा काला धन जमा किया जाता है | उस बैंक का नाम है स्विस बैंक | एक उदहारण के तौर पर इसे समझते है | भारत के किसी बड़े उद्योगपती या राजनेता को किसी से १००० करोड़ रुपये रिश्वत या किसी काम के बदले लेने है तो वो उन पैसो को स्विस बैंक के एजंट के द्वारा हवाला के जरिये स्विस बैंक में रुपयों के बदले डॉलर जमा कर देते है | जिसका पता केवल उस राजनेता को होता है जिसका स्विस बैंक में खाता होता है | भारत का पैसा भारत में ही रहता है मगर स्विस बैंक में राजनेता के खाते में उतने भारतीय पैसे के मूल्य के चलन जमा हो जाता है | हवाला के एजंट और कारोबार पुरे विश्व में हर देश के बड़े बड़े शहरों में चालू है | आज की परिस्थिति में हवाला का दूसरा नाम बिटकॉइन है जो एक केवल आभासी चलन होता है बड़े व्यापारी आज ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बिटकॉइन के माध्यम से कर रहे है जिसका सरकार के पास कोई हिसाब नहीं है | भारत सरकार की मंजूरी भी बिटकॉइन को नही है | बिटकॉइन हमारे देश के साथ दुनिया के लिए भी एक खतरनाक करंसी बना है | पुराने ज़माने भारत के मजदुर आखाती तेल के देशो में मजदूरी करने जाते थे आपनी कमाई की अपने घर भेजने के लिए बैंक द्वारा मुद्रा विनिमय और काफी सारी तकलीफों से बचने के लिए वहा के अपने किसी भारतीय व्यापारी के पास अपनी रकम जमा कर देते थे जो भारत में उसके रिशेदार के पास भारतीय रुपयों में मिल जाती थी दोनों के लिए एक एक बड़ा ही कम तकलीफ वाला सौदा था भारतीय व्यापारी जो भारत में पैसे देता था वो उस आखाती देश के व्यापारी को भारत से खाने पिने चीजे भेजता था | दोनों का व्यापार भी चलता था |मुबई में उस ज़माने में हाजी मस्तान जैसे जितने भी बड़े डॉन होते थे वो हवाला का कारोबार करते थे | उदाहरण के तौर पर एक सिगरेट भारत के मुकाबले अन्य पश्चिमी देश में 5 रुपये में मिलती थी वो सिगरेट भारत में सरकारी टैक्स लगाकर १५ रुपये में बिकती थी तो जाहिर है की उसकी स्मगलिंग होती थी | बहार देश से चोरी चुपके सिगारेट और अन्य तम्बाकू से बनी चीजे भारत आती थी और उन चीजो के बदले भारत के नोट तो नही चलते थे मगर उसके बदले चांदी या सोने के सिक्के दिए जाते थे जिनका हिसाब सरकार के पास नही था | इस प्रकार का हवाला मार्केट उस ज़माने भी चलता था | आज का हवाला कारोबार बिटकॉइन ने अपने पास सुरक्षित कर लिया है | तुरंत पैसे की लेन देन हो जाती है और आँखों के सामने आंकडे भी दिख जाते है | आज भी बड़े मात्रा में देश में कॅश के माध्यम से हवाला कारोबार देशभर में चल रहा है | बड़े शहरों के बड़े व्यापारी जिनके दिखावे के लिए बडे बड़े व्यापार होते है वो अक्सर हवाला के एजंट के रूप में काम करते है | कभी एक ज़माने में दिल्ली की एक संकरी गल्ली में एक टूटी फूटी दुकान के जैसी ऑफिस में एक व्यक्ति एक गंदे मचले कपडे पहनकर बैठा था और अपने डायरी में कुछ कोड लिख रहा था उसके आजूबाजू में नोटों की बोरिया भरी पड़ी थी तो दूसरी और चांदी के सिक्को से भरी थैलिया पड़ी थी वो अपने काम में व्यस्त था | लोग अपने जेब में रुपयों को संभलकर रखते है और हवाला कारोबारियो को उन पैसो की सुध लेने का समय नही होता | जहा बोरिओ में सब्जी भाजी भरी जाती है उन गन्दी बोरियो में भरभर हवाला कारोबारी अपने ग्राहकों में पैसा बाटते है | हवाला के कारोबार से सरकार का बहोत नुकसान हो रहा है मगर सरकार अपेक्षा के तौर पर इस बात पर ध्यान नही दे पा रही है इसका कारण भी ऐसा है की जितने कानून हवाला को लेकर बनाये गए है उतनी ही इन से बचने की सहुलियते इन कानूनों की लूपहोल है | बड़े राजनेता और बड़े पदों पर बैठे अधिकारी कुछ मात्रा में इन गतिविधो में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लिप्त होने से शायद ये कारोबार कभी बंद होगा भी या नही ये कहना मुश्किल होगा | पैसे की चमक और लोभ ,मोह इन्सान को अँधा और सरकार का गूंगा बहरा बना देता है | हवाला का कारोबार करनेवालों का काम हमेशा ही लाजवाब होता है इसलिए हवाला के कारोबार के लोगो के लिए काफी लोग शायद ये टैगलाइन कहते है ( Heavy Amounts With Accuracy Local Agents ) इस बात में कितनी सत्यता है ये कोई नही जानता मगर इनके काम करने का तरीका इस टैगलाइन को पूरा करता है | यह लेख इन्टरनेट और किताबो से उपलब्ध जानकारी और अभ्यास पर लिखित किया गया यदी किसी के साथ ऐसी कोई जानकारी मेल खाती है तो यह केवल एक मात्र संयोग होगा | इस जानकारी में लिखित कुछ बाते पूर्णता सत्य या असत्य हो सकती है | www.vinodahare.blogspot.com

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