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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Wednesday, May 4, 2022

9 प्रकार के लोगो से कभी शत्रुता न ले


विनोद डहारे

साथियो हमारे जीवन मे काफी सारे लोग आते है | कभी ख़ुशी कभी गम दे जाते है | हर एक से सिख जरूर मिलती है | नीचे दिये गये ९ प्रकार के लोगो से कभी भी शत्रुता न करे क्यो की ये लोग आपका कब अहित करेंगे ये आप नही जानते 

०१ ) शत्रधारी - जिंनके हात मे शस्त्र हो और आपके साथ उनका व्यवहार ठीक न हो उनसे झगडा या ताण तणाव वाली परिस्थिती निर्माण हो जाये ऐसे समय मे यदि आपके हात मे किसी भी प्रकार का शस्त्र न हो तो आप कभी भी उस शस्त्रधारी से शत्रुता न मोड ले | वो किसी भी समय आपके उपर वार कर सकता है | आप निहत्थे होणे से आपका अहित हो सकता है 

०२) मर्मी - हमारा जिनके साथ ज्यादा लगाव होता है उठाना बैठना आना जाना होता है ऐसे लोग हमारे मर्म जाणते है | हमारे जीवन के राज जाणते है | हमारी कमजोरीया जाणते है | ऐसे लोगो के साथ शत्रुता होणे पर ये लोग हमारे लिये बडे अहितकारी होते है | भूतकाळ की गल्तियो को सर्वसामान्य कर देते है जीससे हमारी इज्जत आबरू पर आंच आ सकती है | इसलिये मर्मी लोगो से शत्रुता न करे यदि स्वभाव नही पट रहा है तो धीरे धीरे मेलजोल कम करे | समय समय पर मिलते रहे इससे लाभ नही होगा पर नुकसान भी नही होगा |

०३) राजा या पदाधिकारी - बडे पदो पर बैठे राजा समान लोग जिनके हातो मे सत्ता होती है जिनके इशारे पर लोग काम करते है ऐसे राजा समान पदाधिकारीयो से कभी शत्रुता नही करनी चाहिये | ऐसे लोग सामाजिक जीवन मे बडे प्रभावशाली होते है | काफी लोग इन्हे किसी न किसी कारण से अपना आदर्श मानते है | ऐसे लोगो से शत्रुता होने पर इनका सामाजिक बहिष्कार होता है | जिसकी वजह से ये लोग बडे अपमानित होते है | लोगो के सामने तो ये लोग बडे शांत दिखाई देते है मगर एकांत मे अपने सत्ता का उपयोग करके आपके खिलाफ किसी न किसी प्रकार से नुकसान जरूर करते है | जिसका आपको कभी पता नही चलता | इन्हे लोग मिठी छुरी कहते है | 

०४) मूर्ख - मूर्ख लोगो से कभी दोस्ती या दुष्मनी नही करनी चाहिये | मूर्ख लोग स्वयं को नाही जनते अपना हित या अहित होनो मे फरक नही जानते इसलिये वो आपका हित कभी नही चाहते | जिन्हे स्वयं के जीवन के बारे मे पता नही होता वो आपका क्या लाभ करेंगे| ऐसे लोग जो मूर्ख प्रवृत्ती के होते है वो सदा ही नुकसानदेही होते है | ऐसे लोगो को आपका कितना भी अच्छा ज्ञान दो मगर ये कभी नही समज पाते | ज्यादातर ये लोग झगडालु प्रवृत्ती के होते है | अपनी बात मनवाने के आदी होते है | समय टालने के लिये यदी लोगो के सामने आप इनकी गलत बात को सही मान लेते है  तो लोगो के सामने आपकी प्रतिष्ठा कम हो जाती है | इसलिये ज्ञानी से भले ही शत्रुता हो जाये तो ठीक है पर मूर्ख से मित्रता सदैव हानिकारक ही होती है 

०५) धनी - धनी लोगो से कभी भी शत्रुता नही करनी चाहिये | धन के प्रभाव मे वो इन्सान सब कुछ खरीद फरोक कर सकता है | किसी भी प्रकार के गवाह समय रहते धनी व्यक्ती के हित मे होते है | जीवन मे हर किसी को कभी न कभी धन की आवश्यकता जरूर होती है | इसलिये लोग धनी व्यक्ती कितना भी गलत या बुरा क्यो न हो उसके साथ ही रहना पसंद करते है | आज के वर्तमान मे धनी व्यक्ती के साथ संबंध होणे पर ही इज्जत मिलती है ऐसा लोग मानते है | धनी व्यक्ती के साथ कभी भी शत्रुता न ले यदि आप स्वयं धनी न हो |

०६) बातुनी - कभी भी बातुनी व्यक्ती के साथ ज्यादा संबंध न रखे दोस्ती तो होनी ही नही चाहिये | बातुनी व्यक्ती अपने स्वभाव के कारण बातो मे मिर्च मसाला लगाकर बताता है | कभी कभी तो जो घटना घटी ही नही उस घटना को वो प्रतीत करवाता है | जीससे उस व्यक्ती की प्रतिमा जनता मे खराब हो जाती है | उस व्यक्ती की तरफ देखने का नजरिया बदल जाता है | ऐसे लोग आपके बारे मे भी अन्य पक्ष के सामने आपकी धारणा को बदल देते है | आपके प्रती लोगो की धारनाये बदल जाती है | इसलिये बातुनी व्यक्ती से कभी भी शत्रुता नही करनी चाहिये यदि शतृता हो जाती है तो समाज मे आपकी बेइज्जती करने मे बातुनी व्यक्ती को समय नही लगता | 

०७) कवी या लेखक - कवी लेखक या वार्ताहर इन लोगो से कभी भी शत्रुता नही करनी चाहिये ऐसे लोग समाज मे आपकी अपकीर्ती बहोत ही जल्द कर देते है | कवी या लेखक अपनी कविता मे मजाकीया तौर पर ही सही पर अपकीर्ती कर देतें है | लेखक अपने लिखाण मे अपने प्रतिभा को चुभने वाले शब्दो का इस्तमाल कर देते है और वार्ताहर जो इधर की वार्ता उधर पहोचाते है ऐसे लोग शत्रुता होणे पर घडी घडी आपका अपमान करणे की सोच और फिराक मे ही रहते है | इसलिये ऐसे लोगो से कभी भी शत्रुता नही लेनी चाहिये \

०८) वैद्य या डॉक्टर - समय रहते हर इन्सान को वैद्य या डॉक्टर के पास स्वयं या किसी के लिये जाना ही पडता है | किसी भी कारण वश वैद्य या डॉक्टर से भूल हो जाये तो शांती से मामले सुलझा लेने चाहिये | झगडा या जोर जबरदस्ती होने पर समय रहते हम जीत जाते है | मगर सदा के लिये उस वैद्य या डॉक्टर के मन मे आपके प्रती घृणा हो जाती है | इन्सान का शरीर कभी बताकर बिमार नही पडता या बुरा समय कभी बताकर नही आता | इसलिये वैद्य या डॉक्टर की जरुरत किसी भी समय पर हमे पड सकती है | इसलिये कभी भी वैद्य या डॉक्टर से शत्रुता नही करनी चाहिये |  जरुरत के समय वो वैद्य या डॉक्टर हमे मदत नही करते यदि उनसे शत्रुता हो जाये |

०९) रसोय्या -घर मे हो या समाज मे हो कभी भी रसोई बनाने वाले रसोय्या के साथ शत्रुता नही करनी चाहिये | वो अपनी पूर्ण शक्ती से हमारे लिये भोजन बनाता है | किसी भी कारण से भोजन बनते समय छोटी सी भूल हो जाये और भोजन स्वादिष्ट न बने या आपके मन मुताबिक न बने तो झगडा या बेरुखी न करे | रसोय्या  से शत्रुत्व होणे पर आप हमेशा के लिये उत्तम और सात्विक भोजन से दूर हो जायेंगे | भोजन तो बनेगा मगर उसमे वो स्वाद प्रेम सात्विकता नही रहेगी जिसकी अपेक्षा आप हम और सभी लोग रखते है | 

इसलिये ध्यान रहे की उपर दिये गये ९ प्रकार ले लोगो से कभी भी शत्रुता न रखे | ये लोग आपके अस्तित्व की जडे हिला देते है | आपको अंदर से खोखला कर देते है | कभी किसी उपलक्ष मे हमारे अहित की तो हमे जरासी सी भनक भी नही लगती | 

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