भगवान श्रीकृष्ण को पूर्ण संसार जानता है. कहते है की भगवान श्रीकृष्ण स्वयं सर्व शक्तिमान थे. लेकीन उनके जीवन को यदि गंभीरतासे विचार करे तो प्रेम ही उनके जिवन का मुलभूत आधार दिखाई देता है. सभी जानते है की जन्म देनेवाली माता का साथ उन्हे ज्यादा समय के लिये नही मिल पाया. प्रेम के बारे मे यदी देखा जाये तो भगवान श्रीकुष्ण तो राधा को मन ही मन चाहते थे. दुसरी तरफ मीरा ने अपना सब कुछ श्रीकृष्ण को मान लिया था. मगर जीवन की डोर तो माता रुख्मिणी के साथ बंधी थी. यही तो वास्तविक जीवन है. जीससे प्रेम हो जाये वो जीवनसाथी हो ऐसा बहोत कम संभव होता है. आपको जो प्रेम करे उसके जीवनसाथी आप हो ऐसे भी बहोत कम संभव हो सकता है लेकीन कोई अंजान जिसके साथ नियती बंधन मे बांध दे ऐसे व्यक्ती के साथ जीवनभर साथ निभाना चाहिये ऐसी सिख हमे भगवान श्रीकृष्ण के जिवन चरित्र से सिखने मिलती है किसी के प्रती प्रेम या आकर्षण ज्यादातर इन्सान के जिवन मे उम्र के किसी न किसी पडाव पर सुंदर विचार या योवन रूप के प्रती मोह होना एक स्वाभाविक आकर्षण है. उसे संसार की कोई शक्ती रोक नही सकती उम्र के किस पडाव मे किससे कैसे कब और कहा प्रेम हो जाये कोई नही जानता अंतिम शब्द यही कहना चाहता हु जो मिल नही सकता उसकी फरियाद न कर और जो मिला है उसे बरबाद न कर अक्सर बेहतरीन की तलाश मे लोग बेहतर को खो देते है. www.vinoddahare.blogspot.com

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