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Sunday, September 17, 2017

ऐसे बनेंगे सरकारी डिजिटल प्रमाणपत्र / Government digital certificates will be made


भारत एक दुनिया का बडा लोकतंत्र देश होने के कारण आज भी ज्याद्यातर सरकारी काम सरकारी गती से होते है. लोगो को जो सुविधाये निहित समय सीमा मे मिलनी चाहिये वो शायद आज नही मिल पा रही है. लेकीन शायद बहुत जलद सरकारी काम भी जलद गती से हो सकेंगे. भारत सरकार का डिजिटल इंडिया का सपना अब साकार होने वाला है. सरकार को एक अनोखा क्रांतिकारी डिजिटल कदम उठाना चाहिये. देश मे जितने भी सरकारी कार्यालय है जिनसे दस्तावेज मिलते है जिसमे जन्म प्रमाणपत्र, पाठशाला से मिली टी.सी., मतदान कार्ड  , अधिवास प्रमाणपत्र ,जात प्रमाणपत्र , घर या खेती की रजीस्ट्री , संपत्ती के नकाशे  या हर वो प्रमाणपत्र जो किसी भी सरकारी कार्यालय से मिलता हो वो डिजिटल प्रणाली द्वारा ही  मिला होना चाहिये. जिसके उपर बारकोड या क्यूआर कोड होना ही चाहिये. जिसका उपयोग करने से तुरंत उस कोड द्वारा कागज मे लिखित जानकारी सही है या गलत इसकी जानकारी तुरंत मिल जायेगी.  देश मे एक प्रमाणपत्र बनाने के लिये बहोत ज्यादा प्रमानपत्र साथ मे देने पडते है. सरकारी  यंत्रणा को उन कागजो को सत्यापित, प्रमाणित करने  के लिये बहोत ज्यादा वक्त लग जाता है. यदी कोडींग प्रणाली से काम करे तो कागजो को सिर्फ कोडींग ही स्कॅन करते ही तुरंत सब जानकारी मिल  जायेगी ओर अपने आप सिस्टम मे आ भी जायेगी. इससे  काम की  गती बढ जायेगी. किसी भी तरह का कोई गलत काम नही होगा. इसके लिये हम एक उदाहरण लेते है.  एक नगरपालिका का आम चुनाव हो गया चुनाव के वक्त उमिद्वार ने जो कागज दिये उसके अनुसार उसे किसी आरक्षित जगह से जीत मिल जाती है.  तो उसे अगले ६ माह के भीतर अपने जाती प्रमाणपत्र को सत्यापित कराना पडता है. सरकारी कार्यालयो मे  काम का बोझ ज्यादा होने  से काम की गती कम हो जाती है. ओर कोई समय सीमा निर्धारित नही रहती. इसका फायदा गलत लोगो को होता है . यदी चुनके आये उमिद्वार के कागज डिजिटल कोडींग वाले हो तो जाती प्रमाणपत्र सत्यापन के लिये जब भी कोई प्रस्ताव जायेगा तो साथ मे दिये गये कागजो के कोडींग पर स्कॅन करते ही कागज पर लिखा डाटा कॉम्पुटर मे यदि सही होगा तो मेल खायेगा , आ जायेगा.  यदी उस कागज के साथ कोई भी हेराफेरी की गई होगी तो जानकारी गलत आयेगी. ज्यादातर लोग तो सही जानकारी देते है.  तो काम भी जलद गती से हो जायेगा. जो भी कार्यालय प्रमाणपत्र देंगे वो भी सर्वर से ही बनके आयेंगे.  तो उसकी जानकारी हमेशा सर्वर मे होगी. कही भी ,कभी भी उस कागज को कोई भी आम इन्सान चेक कर सकेगा. जीस तरह एक इन्सान के दो आधार कार्ड नही बन सकते वैसे ही एक कोडींग के दो कागज नही बन सकते. प्रमाणपत्र सर्वर से निकलेंगे तो उन्हे स्कॅनिग करके जाचने मे सरल ओर सुविधाजनक होंगे. यदी किसी को जात का प्रमाणपत्र बनवाना है तो वो  किसी नगर पालिका, पटवारी, पाठशाला, जिल्हाधिकारी कार्यालय से प्रमाणपत्र लायेगा जिसके उपर कोडींग होगी. कोई भी प्रमाणपत्र मिलता है तो वो भी सर्वर से ही निकला होगा. उसपर भी कोडींग होगी. जात प्रमाणपत्र बनाने के लिये जब भी प्रस्ताव जायेगा तो कागज कि सत्यता के लिये लगने वाला समय बच जायेगा. सरकारी काम की गती बढ जायेगी.  देश डिजिटल क्रांती की तरफ एक कदम ओर बढ जायेगा. www.vinoddahare.blogspot.com   

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