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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Tuesday, January 23, 2018

क्या ऐसी होनी चाहिए नई शिक्षा प्रणाली / kya aisi honi chahiye nai shiksha pranali

             

यह लेख मेरे भविष्य ज्ञान के आधार पर लिखित किया गया है भविष्य मे कभी न कभी यह व्यवस्थाये इस देश मे सुचारू रूप चालू होंगी ऐसा मेरा दृढ विश्वास है. आज भी हमारे देश मे एक हि किस्ती सबको सवार करके शिक्षण व्यवस्था चालू है सभी भाषाओ मे शिक्षा मिलती है मगर शिक्षा का मुल हेतू सिर्फ ओर सिर्फ सरकारी नौकरी पाना यही एकमात्र बनसा गया है. शिक्षा से इन्सान अपना जीवन सही तरीके से जिने का कोई हुनर सिखे जिसकी वहज से वो अपना परिवार पाल सके.  आज के भी दौर मे शिक्षा एक जगह सिकुड गई है. रात रात भर जागकार बच्चे किताबी ज्ञान अर्जित कर लेते है मगर जीवित रहने का या आर्थिक नियोजन का ज्ञान वो नही ले पाते. १८ साल कि लडकी या लडका परीक्षा मे १०० मे से ९५ मार्क्स तो ला लेते है मगर भूक लगने  पर दो रोटी या सब्जी ,चावल तक बना पाने मे असमर्थ दिखते है. पिता या रीश्तेदारो द्वारा मिली राशी को कैसे भविष्य को सुरक्षित रखकर व्यवहार करे ये ज्ञान पाने मे असमर्थ होते है.  अक्सर किताबो से पढकर तैरना सिखनेवाले लोग पाणी मे गिरते हि डूब कर मर जाते है लेकीन उन्हे  तैरना नहि आता.  खूब ज्यादा पढाई करने वाले होनहार भी ज्यादातर लोग घर के बुजुर्गो के कभी पाव पढकर आशीर्वाद लेते नहि दिखते देश मे शिक्षा का स्तर अनुभव हिनता ओर संस्कार से परे हो रहा है ऐसा नहि होना चाहिये शिक्षा मे कक्षा १ से लेकर कक्षा  ८  तक कि  प्रायमरी शिक्षा सरकारी स्कुलो मे हि सक्ती से होनी चाहिये जितने भी निजी पाठशाला अब तक खूल चुकी हैं उन्हे भी सरकारी घोषित कर देणा चाहिये इसके उपरांत कोई भी प्रायवेट शिक्षा संस्थान कक्षा १ से 8 तक नही  खुलेगा कक्षा ९ से  लेकर आखरी स्नातक तक प्रायवेट शिक्षा संस्थान तो खुलेंगे मगर वो सभी पूर्णता सरकार के देखरेख मे चलेंगे पदवी तक या उससे कोई भी शिक्षा पाने का हक अपनी योग्यता पर होगा सरकारी नौकरी करणे के लिये सक्त कानून बनाये जायेंगे के जो वक्ती सेना मे कम से कम ५ साल तक सेवा कर चुका है उस इन्सान को सरकारी सेवा करने का सबसे पहले मोका मिलना चाहिये. विक्लान्गोको छोडकर यह कानून बनने  चाहिये सरकारी नौकरी करणे का सिर्फ २० साल का प्रावधान होना चाहिये ताकी २५ साल कि उम्र मे नौकरी पर लगने  वाला इन्सान ४५ साल मे रिटायर हो ओर बची जिंदगी स्वयं द्वारा बचत कि गई राशी पर मिलनेवाली पेन्शन के साथ कोई न कोई काम जरूर करे जिसमे उसे हुनर हो नोकरी कम होणे से जीवन का नियोजन भी अच्चे तरीकेसे हो सकेगा ओर देशसेवा के साथ रोजगार के अवसर भी ज्यादा नवजवानो को मिल सकेंगे शिक्षा तो जीवन को सही तरीके से जिने के लायक बनाती है  सरकार पर कोई भी नोजवान बोझ नहि बनेगा सभी संस्थानो मे कर्मचारी यो के वेतन न्यूनतम वेतन प्रणाली से मिलने का प्रावधान करणे से सरकारी नौकरी कि चाह कम हो जायेगी. आज कि मौजूदा सरकारी पाठ्शाला ओर निजी संस्था कि पाठशाला  इनमे एक बडा हि अंतर दिखाई देता हैं जिस दिन सरकारी पाठशाला के शिक्षक के निजी घर के जैसे सरकारी पाठशाला दिखाने लगेंगी ओर निजी पाठशाला जैसे उन निजी पाठशाला मे काम करनेवाले शिक्षको के वेतन भी मिलेंगे तब देश कि शिक्षा सही मायनो मे कार्यान्वित होंगी  www.vinoddahare.blogspot.com

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