शहरो ओर ग्रामीन एलाको मे निजी कामो के लिये किरायो पर मिलने वाली प्रवासी गाडीया Taxi जैसे कि इनोवा झायलो , सुमो , तवेरा या अन्य किसी भी प्रकार कि गाडी यदी किसी को १ दिन के लिये किराये पर चाहिये तो शहर मे तुरंत मिल जाती हैं. गाडी का किराया भी किलोमीटर के हिसाब से वाजिब लागू होता हैं. मगर आज भी गाव खेडे कि बात करे तो शिक्षा ओर ज्ञान कि कमी ओर भय कि वजह से ग्रामिनो को काफी दिक्कतो का सामना करना पडता हैं. गाव मे एक अजब हि एक बरसो पुराना अंदाज पाया जाता हैं. ग्रामीण अपनी जरुरत के हिसाब से गाडी किराये पर लेना चाहते हैं. ओर जब भी कोई गाडी किराये पर लेते हैं तब गाडी मालक उन्हे अपने मन मार्जीसे निश्चित किराया बताता हैं मोलभाव द्वारा गाडी किराया तय किया जाता हैं. यदि गाडी शहर कि तरह ग्रामीण एलाको मे किलोमीटर के दायरे से चले तो गाडी का भाडा कम होता मगर लोगो के अज्ञानता कि वजह से गाडी का ज्यादा किराया ग्रामिनो को मजबुरन देना ही पडता हैं. मगर यदि ग्रामीण भागो से बेरोजगार युवक या युवती अगर वाहन किराया कि नए तकनीक अपनाये तो ग्रामीण लोगो के साथ साथ ग्रामीण युवको को भी रोजगार मिल जायेगा. नए किराया तकनीक मे वाहन का के दिन का फिक्स किराया ५०० रुपिया होगा ओर हर किलोमीटर के लिये १० रुपिया किराया तक किया जायेगा कम से कम ५० किलोमीटर का किराया अनिवार्य होगा उसके उपर जितना भी किलोमीटर वाहन चलेगा उतना गाडी का किराया होगा. उदाहरण के तौर पर यदि आज के सामान्य परिस्थिती मे लोग ६० से ६५ किलोमीटर का जिल्हे का सफर १८०० रुपिया से लेकर २००० रुपिया तक फिक्स किराये मे करते हैं फिर शहर जाकर काम कि वजह से थोडा इधर उधार घुमने से वाहन चालक तथा वाहन मालक से अनबन आम बात होती हैं मगर यदि हम किराया उसी का देखे तो लगभग १२० किलोमीटर का किराया १२०० रुपिया ओर ५०० रुपिया फिक्स कुल १७०० रुपिया होगा इससे ग्राहक के पैसे भी बचेंगे ओर वाहन चालक या वाहन मलिक से अनबन भी नहि होगी. यदि वाहन ज्यादा चलेगा तो वाहन का किराया भी बढेगा. इससे वाहन मलिक ओर वाहन चालक को भी फायदा होगा साथ हि साथ वाहन मालिक का ज्यादा फायदा होगा. लोग इस नये कदम का स्वागत हि करेंगे. समय लगेगा मगर लोगो कि सुविधा हो जायेगी. ओर लोग आर्थिक साक्षर भी हो जायेंगे. www.digitalmaharastra.blogspot.com

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