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हमे आज भी सस्ती चिजो का शौक नही सपने बेचने वालो की खामोशीया भी उनके लफ्जो से ज्यादा महँगी होती है |

Sunday, August 8, 2021

सादगी भरा आदर्श जीवन जीते है रतन टाटा / adarsh jiwan jite hai Ratan Tata

ratan tata

भारत के सुप्रसिद्ध व्यवसायिक रतनजी  टाटा जब जर्मनी अपने व्यापार के सिलसिले मे अपने भारतीय अधिकारीयों के साथ गये थे | अपने व्यापारिक कम ख़त्म हो जाने पर वहां के एक अछे रेस्तरां में अपने सभी भारतीय अधिकारियों के साथ खाना खाने टेबल पर बैठ गए | खाने का ऑर्डर दिया गया | पास की ही एक टेबल पर दो बूढ़ी जर्मन महिलाये खाना खाने के लिए किसी का इंतजार कर रही थी | पास के ही एक टेबल पर एक युवती और एक युवक भी खाना खा रहे थे रतन टाटा के साथ उनके अधिकारी भी खाने पर साथ साथ थे सबने अपने पसंद का खाना खाया और कुछ थोडा खाना थाली मे शेष रह गया था | सब हात धो रहे थे की अचानक एक बूढी माहिला अपने टेबल से उठी पास आकर कूछ पूछा और तुरंत कही फोन लगाया 5 मिनट मे उस रेस्तरां में जर्मन पुलिस आई और रतन टाटा को ५० युरो का जुर्माना लगाया | रतन टाटा ने बिना कुछ सवाल जवाब किये अपना जुर्माना जगह पर भर दिया और रसीद संभालकर रखी | जर्मन पुलिस जुर्माना वसूलकर चली गई | जब रतन टाटा ने बड़े नम्रतासे उस महिला और रेस्तरां के अधिकारी से कारण पूछा तो पुछने पर महिलाने भी बड़ी ही सादगीसे कहा सर अपने जो खाना खाया है उसके लिए अपने जो पैसा इस रेस्तरां के मालिक को दिया है वो तो पैसा आपका है मगर उस खाने के लिए लगे पकवान और ये ये सभी संसाधन तो हमारे देश के है| और माफ़ कीजिये हम हमारे देश के संसाधन बरबाद करणे का किसी को भी कोई हक नही है | बड़े से बड़े अधिकारी हो या राजनेता हो हमारे देश के संसाधन हम यु बर्बाद करते किसी को सहन नही करते और न ही करेंगे | रतन टाटा ने जीवन में एक बहोत बड़ा ज्ञान उन जर्मन महिलाओं से लिया | चाहे जीतनी दौलत आपके पास क्यों न हो पर अन्न तो केवल अन्न होता है | जिसे कभी व्यर्थ नही जाना चाहिए | काफी समय पहले एक कहावत है जो आज भी बड़ी ही प्रसिद्द है उतना ही लेना थाली में के बह न जाये नाली में | साथियो इस कहानी से हमें ये जरुर सोचना चाहिए की हमें जितने अन्न वस्त्र या धन की जरुरत हो उतनी ही अपने पास रखनी चाहिए अन्यथा वो व्यर्थ हो जाती है | आज भी रतन टाटा और उनके कर्मचारी बड़ी ही सादगी पूर्ण जीवन जीते है | दूसरा किस्सा ऐसा है जब एक बार रतन टाटा अपने कंपनी के काम से कही जा रहे थे की उनके हेलीकॉप्टर में खराबी आ गई पायलट ने नजदीकी शहर के पास उस हेलीकॉप्टर को उतार दिया उनके सहायक ने उस शहर के एक शोरूम मालिक को फोन किया और घटना की सूचना दी | शोरुम मालिक के साथ बातचीत हो जाने पर शोरुम मालिक अपनी कार लेकर उस जगह जल्द ही पहोच गए | वही से थोड़ी ही दुरी पर टाटा के उत्पादन का प्लांट था | खबर जल्द ही प्लांट मैनेजर के पास पहोच गई | आनन फानन में वो रतन टाटा को लेने के लिए निकल पड़े | रतन टाटा उस शोरुम मालिक की कार में शहर जा रहे थे की अचानक उन्हें अपनी कम्पनी के बारे में सहायक ने सूचना दी | बड़े विनम्र भाव से रतन टाटा ने अपने कंपनी में जाने के लिए शोरुम मालिक से इजाजत मांगी और कर कम्पनी के गेट से सामने कड़ी हो गई | कंपनी का गेट नही खुला | गाड़ी का ड्राइवर गेटमन  से बोला गेट खोलो गाड़ी में रतन टाटा बैठे है जो इस कंपनी के मालिक है | गेटमन में गेट नही खोला लेकिन उसने भी गाड़ी में झाककर देखा तो उसे गाड़ी में रतन टाटा बैठे दिखे मगर फिर भी उसने गेट नही खोला | अब शोरुम मालिक से रहा नही गया और उसने गेटमन से ऊँची आवाज में गेट खोलने के लिए कहा पर गेटमन में फिर भी गेट नही खोला उसने कहा बिना गेटपास के वो गेट नही खोलेगा | बात अन्दर ऑफिस तक गई और कम्पनी के बड़े अधिकारी दौड़ते गेटतक पहोचे छोटे गेट से बहार निकलकर देखा तो सामने रतन टाटा खड़े है | बड़े अधिकारी ने गेटमन से कहा जल्द गेट खोलो पर फिर भी गेटमन ने गेट नही खोला | उसने अधिकारी से कहा सर आप बड़े अधिकारी है आप मगर बिना गेटपास के मै गेट नही खोल सकता | मुझे माफ़ करे | इतने में एक कर्मचारी गेटपास लेकर आ गया गेटमन ने गेटपास चेक किया और गेट खोल दिया | उतने में मैनेजर साहब भी वह पहोचे उन्होंने गेटमन की तरफ बड़ी ही घूरती नजरो से देखा और अन्दर चले गए | थोड़ी देर में गेटमन को रतन टाटा ने अन्दर बुला लिया अब तो गेटमन को पक्का लग रहा था की उसकी नौकरी जा चुकी है | वो घबराते हुवे अन्दर गया | कंपनी के बड़े हॉल में सभी कर्मचारीगण और सभी मजदूर जमा हो गए थे | अब सब के सामने बेइज्जती के साथ रतन टाटा मुझे नौकरी से निकालेंगे ऐसे गेटमन  को लग रहा था | रतन टाटा ने तब तक गेटमन की आवश्यक जानकारी जुटा ली थी | सभी के सामने रतन टाटा ने कहा सामने कंपनी का मालिक होने पर भी या किसी बड़े अधिकारी के कहने पर भी गेट नहीं खोला गया ऐसे कर्मचारी जिस कंपनी में इमानदारी से पूरी निष्ठा से काम करते है वो कंपनी कभी नुकसान में नही आ सकती | गेटमन का स्वागत श्री रतन टाटा ने सबके सामने किया और उचित पुरस्कार देकर वहा से चले गए | साथियो अपने काम के प्रती इतने इमानदारी से जहा कर्मचारी काम करते हो वहा का मुखिया ईमानदार होना ये एक कारण है |

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