महाराष्ट्र मे आरोग्य सेवा के कर्मचारी कोरोना के काल मे जनता के लिये बहोत ही फायदेमंद भगवान साबित हो गये है | निजी प्रायव्हेट दवाखाने के बदले सरकारी आरोग्य सेवा ही लोगो के लिये बडे पैमाने पर काम आ गई | करोना की पहली और दुसरी वेव ने सरकारी आरोग्य सेवा की धज्जीया उडा दी | सरकारी आरोय सेवा मे राज्य सरकार द्वारा भरे जाने वाले पदो की मौजुदा हालत बहोत ही ज्यादा खराब है | तकरिबन ४० % आरोग्य सेवा के पद काफी समाय से खाली पडे है | काफी सालो से इन पदो को भरने की मांग पुर्जोर तरीके से आम जनता की और से हो रही है पर सरकार और सरकार के प्रतिनिधी इनकी अनदेखी हमेशा से हो रही है | आज का मुद्दा ये नही है की आरोग्य सेवा मे पदो की भरती होनी चाहिये वो तो जरुरी है और समय की मांग भी है | जब तक पुरे तरीकेसे आरोग्य सेवा मे पद भरती नही होगी तब तक काम का अतिरिक्त बोझ उपलब्ध कर्मचारीवर्ग पर ही रहेगा | सरकार हर रोज कोई न कोई नई योजना लाती है और उपलब्ध कर्मचारी उन सभी योजनाओ को लागू करते है ये उनकी मजबुरी है | सरकार यदी योजना लाती है तो उसे पुरा करना ही होगा | आज का मुद्दा है सरकारी डॉक्टर जो भूल रहे है अपना वैद्यकीय मुल ज्ञान और कर्तव्य इसके बारे मे काफी अनुभव लेने पर ही ये सब बात आपके सामने कछ तथ्य रख रहे है | साथियो महाराष्ट्र मे यदी सबसे निचले स्तर पर देखा जाये तो एक तालुका स्तर पर एक MBBS डॉक्टर तालुका आरोग्य अधिकारी के तौर पर सरकार की तरफ से नियुक्त किया जाता है | जिसका काम पुरे तालुके की आरोग्य सेवाये सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी होती है | एक तालुका के अंतर्गत जितनी भी प्राथमिक आरोग्य केंद्र होते है वहा के कारभार पर ध्यान देना और ज्यादा से ज्यादा लोगो तक स्वास्थ सेवाये पहुचना ये इनकी जिम्मेदारी होती है | साडे पांच साल तक कडी मशक्कत और कडा इन्तीहान देकर जब कोई एक MBBS की परीक्षा पास करता है और लोगो की सेवा के लिये एक डॉक्टर बनकर समाज मे आता है तो उसके काफी सारे सपने होते है | आम जनता के दुख दर्द मिटाने के लिये सहायक होने के सपने लेकर वो आता है | जब उसे जिल्हा परिषद मे किसी तहसील के तालुका आरोग्य अधिकारी या समकक्ष किसी पद पर या उससे उपरी पद पर नियुक्ती मिलती है तो वह डॉक्टर जिसने मानव के शरीर की सेवा के लिये पढाई की थी वो अपना सेवा का धर्म और कर्म दोनो भुलकर सिर्फ और सिर्फ के कागजी कार्यवाही करणे वाला एक अधिकारी बन जाता है | एक डॉक्टर और एक प्रशासन सांभालने वाले अधिकारी मे काफी अंतर होता है | एक डॉक्टर का जो प्रोफेशनल काम होता है उसे अपने काम को पूर्ण करने के लिये ही सेवा मे होना चाहिये मगर आज देश के सभी राज्यो, प्रदेशो मे लगभग यही स्थिती है | अपनी सरकारी नौकरी पर लगे लगभग सभी सरकारी डॉक्टर अपना कर्तव्य भूल रहे है ये बडे ही खेद से कहना पड रहा है | यदि एक छोटासा अंको का गणित किया जाये तो एक तहसील मे एक MBBS डॉक्टर होता है ऐसे एक जिल्हे मे कम से कम १० से १५ डॉक्टर होते है और जिल्हा स्तर पर विभिन्न पदो पर ५ से लेकर ६ डॉक्टर होते है कुल २० से २५ डॉक्टर एक शाखा मे होते है | जिल्हा स्तर पर काफी सारी शाखाये होती है जैसे की कुष्ठरोग है हत्तीरोग है पोलिओ है और इस तरह के काफी सारे सेक्टर होते है कम से कम एक जिल्हे मे ३० से ५० तक ऐसे डॉक्टर हमे मिल जायेंगे जो अपना क्लिनिकल काम छोडकर केवल प्रशासनिक काम आज संभाल रहे है | सरकार प्रशासन कार्य के लिये MPSC द्वारा वर्ग दो के अधिकारी की नियुक्ती कर सकती है | जिससे वो डॉक्टर जो की अपनी मानवसेवा ,रुग्ण सेवा के लिये समर्पित है वो लोक वो डॉक्टर लोगो की सेवा ही करेंगे | अपनी प्रक्टिस अपने सरकारी दवाखाने मे करेंगे | छोटे से छोटे और बडे से बडे ऑपरेशन करेंगे | हमेशा अपना अपने पेशे मे निरंतर ज्ञान बढायेगे | आज राज्य के बारे मे अगर जानकारी लेंगे तो कम से कम एक जिल्हे मे ५० इस तरह महाराष्ट्र के ३६ जिल्हो मे १५०० से ज्यादा MBBS डॉक्टर अपने मुल कर्तव्य से काफी दूर जा रहे है | डॉक्टर एक ऐसा पेशा है जहा तरह तरह की नये नये दवाई के बारे मे हर रोज जानकारी आती है | नई दवाई बाजार रोज आ रही है | नये नये संशोधन रोजाना हो रहे है इसलिये डॉक्टर को भी अपने क्षेत्र मे अपडेट रहना पडता है | लेकीन ये प्रशासनिक कार्य मे रहने वाले डॉक्टर समय रहते ना स्वयं की ना ही अपने परिवार को ठीक तरह से जाचं कर पाते है | इन्सान जीवन मे जिस चीज का ज्ञान बडे मेहनत से लेता है उस ज्ञान को यदी वो सही दिशा मे नही लगाता तो स्वयं के साथ समाज और देश का नुकसान होना तो तय ही है | बहोत कम लोग बडी ही मुश्कील से MBBS डॉक्टर बन जाते है | अमीर बच्चे तो अपने मा बाप या रीश्तेदार के हॉस्पिटल मे काम करते है और अपने दवाखाने मे आने वाले लोगो से मोटी तगडी फीस लेकर पैसा कमाते है | और जो गरीब बच्चे MBBS डॉक्टर होते है वो सरकारी नौकरी लगने पर इस तरह प्रशासन अधिकारी बन जाते है | इसलिये वो अपनी प्रक्टिस बीच मे छोड देते है और उनके MBBS के ज्ञान का फायदा आम लोगो नही होता | यदी सरकार चाहे तो इन सभी डॉक्टरो को अपने चिकित्सा क्षेत्र मे अपने मन मुताबिक कार्य करणे के लिये आझाद कर सकती है | यह आज नही तो कल जरूर होगा और होना ही चाहिये |यही समय की मांग है | स्वतंत्रता तो हर प्राणी का मुलभूत अधिकार होता है इसलिये उन सभी को स्वतंत्रता मिलनी ही चाहिये | अपने पसंद और ज्ञान का उपयोग सही कार्यो के लिये करणे का अधिकार उन्हे मिलना ही चाहिये |
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