साथियो हम अक्सर ये देखते है की आमिर इन्सान ज्यादा आमिर हो रहा है और गरीब इन्सान बहोत ज्यादा गरीब हो रहा है | ऐसा क्यू हो रहा है | भगवान ने अमीर और गरीब इन्सान दोनों को दिन के २४ घंटे निशुल्क और एक सरीके दिए है मगर अमिर और ज्यादा अमिर हो रहा है और गरीब आदमी अधिक गरीब हो रहा है | यह केवल मात्र सोच आ अंतर होता है | गरीब लोग और आमिर लोगो की सोच कैसी होती है इसके कुछ उदहारण हम देखेंगे उनके जीवन के कुछ सिद्धांत हम आज के इस लेख में जानेंगे | साथियो आमिर लोग हमेशा अमोरो वाली सोच रखते है वो अपने आप को हमेशा मालिक समझते है | हर सरकारी व्यवस्था के वो मालिक है ऐसी सोच उनकी होती है इसलिए वो अपने व्यवहार से हमेशा वो व्यर्थ की चीजो में गवाना पसंद नही करते | अमीर लोग यदी किसी काम से किसी किसी कार्यालय में जायेंगे और उन्हें बेफजूल कोई पंखा चालू दिखाई देता है जहा पर कोई नही है तो वो स्वय उस पंखे को बंद कर देते है | क्या होती है अमीरों की सोच ? वो हमेशा बचाने में विश्वास रखते है | जब किसी चीज की जरुरत न हो तो उसे बचाना चाहिए | उस चीज को बनाने के लिए करोडो रुपियो के संसाधन लग चुके है | आमिर लोग छोटी चीजो पर बहोत ज्यादा ध्यान देते है | उन्हें छोटी छोटी चीजो के जोड़ने से ही भविष्य में बड़ा लाभ होता है इस बात का पता होता है | गरीब लोग हमेशा खर्च करने की मनस्थिति में होते है | जीवन का कोई भरोसा नही यही बात हमेशा करते रहते है | इसलिए किसी चीज या पैसे को भविष्य के लिए कभी संजोकर रखने की कोई योजना उनके पास नही होती | आये पैसे को पूर्ण खर्च करना जीवन में केवल आनंद लेने की प्रवृत्ती भरी होती है | अमिर लोग और गरीब लोगो के बिच एक बुनियादी परस्पर विरोधी सिद्धांत होता है जिसको जानकर सभी को आश्चर्य होता है क्या होता है वो बुनियादी सिद्धांत | साथियो किसी इन्सान से पूछो की बचत क्या होती है तो वो बताएगा की कमाई के बाद खर्चा करने पर जो कुछ बच जाता है उस शेष को हम बचत कहते है | उनके हिसाब से ये सच भी है | हर महीने राशी शेष बचेगी ऐसा या सरीकी ही शेष बचेगी ये कहना मुश्किल होता है | इसके विपरीत अमीर लोगो से पूछ लिया जाये के बचत क्या होती है तो वो सीधा ही जवाब देंगे की हर महीने या हर दिन जीतनी राशी हमें बचानी है उतनी राशी को पहले बचाकर शेष राशी में गुजारा और व्यवहार हो जाने चाहिए थोड़ी सी तकलीफ हो सकती है मगर बचत इसी को कहते है की पहले अपने निश्चय पर अडिग रहो | अमीर इन्सान हमेशा चक्रवर्ती ब्याज और उससे मिलने वाले लाभ पर विश्वास रखता है निरंतर भविष्य के लिये पुंजी जमा करता रहता है | यदी अमीर व्यक्ती को कोई चीज भी खरीद्नी हो तो वो उसके लिये पहले उसका नियोजन करते है | उस चीज के लिये किसी भी प्रकार का रेपेमेंट न करना पडे ये सोच उनकी होती है | यदी अमीर व्यक्ती को पाच लाख रुपये की कार भी लेनी हो तो महिने के दस हजार रुपये वो अलग से जमा करते है और चार पाच साल बाद वो कार नगद पैसे से खरीद लेते है | उसी तरह हा काम का नियोजन होता है | गरीब लोग इसके विपरीत सोच रखते है | थोडेसे पैसे भरकर बहोत ज्यादा कर्ज और EMI पर कार खरीद लेते है और बडे समय के लिये EMI के लिये पैसे भरते रहते है | अमीर इन्सान चक्रवर्ती ब्याज और उसके कार्य पर विश्वास रखते है | जैसे की अमीर इन्सान हर महिने दस हजार रुपये प्रती माह के RD यदी निकालते है तो वो १२ महिने बाद जब उसके १२५०००० रुपये मिलते है तो उन पैसो को वो अमीर इन्सान अगले १४ महिने के लिये FD कर देते है जिसका १० प्रतिशत ब्याज अगले १४ महोनो बाद ब्याज के साथ राशी मिल जाती है ऐसे ही उस पैसे को वो हर १४ महिनो के लिये FD करते है | अपने खर्चे निहित और सीमित रखते है | इसलिये अपने बचत वाले लक्ष के प्रती वो जल्द ही पार कर जाते है | गरीब इन्सान कभी भी बचत के बारे मे गंभीर नही होता | वो हमेशा जीवन को छोटा समझता है | जीवन के प्रती नकारात्मकता से भर देता है | सबसे बडी बात होती है के उसकी मित्रता कैसी है | यदी किसी इन्सान की मित्रता अमीर लोगो के साथ होगी जो अपने जीवन मे बचत को ज्यादा महत्व देते है तो वो व्यक्ती भी अमीर ही होगा और हमेशा सन्मान का हकदार होगा | इसके विपरीत जो इन्सान व्यसनाधिनता के अधीन होगा उसके मित्र भी वैसे ही होंगे | सामान्य रूप से एक बात काही गई है की फेरारी या BMW जैसी कार कंपनीया अपने गाडीयो की कभी TV विज्ञापन नही करते मारुती या TATA जैसे काफी कंपनीया TV पर अपने कार का विज्ञापन निरंतर करते है | यही सोच का अंतर है | फेरारी और BMW के मलिक ये जानते है की जो फेरारी या BMW खरीदेगा उसके पास TV देखने का समय नही होगा | और जो TV देखकर अपना समय व्यर्थ गवा रहा है वो जीवन मे कभी भी फेरारी नही खरीद सकता | फेरारी खरीदने वाले इन्सान की दोस्ती उसी अमीर इंसन से होगी जिसके पास फेरारी या BMW होगी | वो उससे ही पुरी जानकारी ले लेगा | जिसके लिये विज्ञापन पर पैसा खर्च करणे की जरुरत नही | अमीर इन्सान हमेशा अपने निंद के समय भी पैसे को बढाने के लिये ऐसे कार्य करता है जीससे की उसके पैसे हमेशा बढते है | आखिर मे सथिओ एक ही बात कहता हु की हमे जब तक पैसे के लिये काम करना पडे तब तक हम गरीब ही रहते है मगर जिस दिन पैसा हमारे लिये काम करता है उस दिन सही दिशा मे हम अमीर हो जाते है | पैसा भगवान तो नही मगर भगवान से कम भी नही | www.vinoddahare.blogspot.com

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