एक अमीर आदमी अपने बड़े से घर के बड़े खिडकी से बाहर देख रहा था। एक गरीब आदमी कूड़ादान में से कुछ चुन चुन कर उठा रहा था। आमिर आदमी ने अपने आप से कहा, "भगवान न करे की जिवन में मुझे कभी ऐसे कुड़ा कचरा उठाना पड़े, अच्छा है की मैं गरीब नहीं हूं।"थोड़ी देर बाद अमीर इंसान ने घर से बाहर निकलकर दूर गली की और देखा, एक पागल नंगा इंसान सड़क पर अपने मस्ती में नाच रहा था | उस आमिर इंसान ने अपने आप कहा, "भगवान, मैं आपका धन्यवाद करता हूं की मैं पागल नहीं हूं।" तभी अमिर इंसान ने एक एम्बुलेंस में मेरीज को अस्पताल ले जाते देखा फिर से उस अमिर आदमी ने कहा, "भगवान तेरा लाख लाख शुक्र है, मैं बीमार नहीं हूं।" उससे अब रहा नहीं गया और वो उस एम्बुलेंस के पीछे अपनी कार लेकर हॉस्पिटल आ पहुचा तभी उसे हॉस्पिटल में कुछ लोग एक शव ले जाते देखा । उसने अपने आप से कहा, "भगवान का शुक्र है की मैं मरा नहीं हूं।" उसने अपने आप से कहा केवल एक मरा हुआ व्यक्ति ही ईश्वर को धन्यवाद नहीं दे सकता। आज आपके सभी आशीर्वादों और जीवन के उपहारो के लिए हमें उस परमेश्वर का आभारी होना चाहिए। जिंदगी क्या है जीवन क्या है ? जीवन को बेहतर ढंग से समझने के लिए हमें अपने मन के समाधान के लिए केवल इन 3 स्थानों पर जाना होगा जहा जीवन का सत्य अस्पताल,कारागार और शमशान में मालूम होता है
1. अस्पताल 2. कारागार 3. शमशान
अस्पताल में, यह समझ जाएगा की स्वस्थ जीवन से ज्यादा सुंदर और मौल्यवान कुछ भी नहीं है। अस्पताल के मरीजों को जब आप बड़ी ध्यान से निहारेंगे तो आपको ऐसा दिखेगा की उनके दुःख पीड़ाये उन्हें जीवन से मुक्ति पाने के लिए बार बार कह रही है | कुछ लोग तो अपने जीवन से परेशान हो गए है बेकार ही अपने जीवन और सांसो का बोझ ढो रहे है अपनी बीमारी से परेशान मरीज भगवान से अपनी मृत्यु की कामना कर रहे है | काफी जगह ऐसा देखा गया की परिवारवाले सगे संबंधी भगवान से मांग कर रहे थे की जिनकी वो सेवा कर रहे है उन्हें जल्द से जल्द इस दर्दनाक जीवन से मुक्ति मिल जाये | जीवन का सत्य अस्पताल,कारागार और शमशान में मालूम होता है
2. कारागार में आप देखेंगे की आझादी सबसे ज्यादा कीमती और मौल्यवान चीज होती है। अपने द्वारा किये गए किसी गुनाह की सजा भुगत रहे इंसान को जीवन भर या उसके लिए निर्धारित समय के लिए दंड भुगतना पड़ता है | पर कई बार ऐसा भी देखा गया है की किसी प्रकार का कोई गुनाह न करते भी किसी के गलत दुर्व्यवहार के कारण कई पीड़ित लोग कारागार में सालो तक पड़े रहते है | उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता | अपने जीवन की आज़ादी खोये इंसान को सही मायनों में पता होती आज़ादी की किमत | यदी कोई महिला किसी कारणवश कारागार में चली जाती है और वो माँ बनने वाली हो तो उसके बच्चे को भी कारागार में अपना जीवन बिताना पड़ता है | उसे आझादी की किमत पता होती है | कारागार में बंदी लोग तरस जाते है अपनो को देखने के लिए जो कभी आपके लिए सबकुछ हुआ करते थे | जीवन का सत्य अस्पताल,कारागार और शमशान में मालूम होता है
3. समशान में आपको एहसास होगा की जीवन बहुत कुछ है ।जब तक साँसे चल रही है तब आप का अस्तित्व और नाम काम सब आपके लिए होता है | मृत्यु के बाद आपके साथ कुछ नहीं जाता कोई भी कुछ नहीं ले जाता | लोग जब तक मृतक का शव होता है तब तक ही रोना और विलाप करना बडे पैमाणे होता है एक बार शव का दाह संस्कार हो जाये तो फिर सिर्फ यादे रह जाती है । जीवन मे इन्सान ने क्या कमाया वह कैसा इन्सान था इसका सही लेखाजोखा केवल शवयात्रा मे होता है । आप जीवन मे जीवित रहते कभी अपना ऑडिट नही कर सकते क्यो की आपके बारे मे यदी किसी ने ऐसा कहा दिया जो आपको पसंद न हो तो आप जीवन भर उससे मुह मोड लेंगे और उसके प्रती आपके मन मे एक धारणा बना लेंगे जो कभी भी किसी भी किमत पर नही बदलगी । जीवन का सत्य अस्पताल,कारागार और शमशान में मालूम होता है |
जिवन में कई ऐसे अनसुलझे सवाल होते है जो घटित तो होते है मगर उनका जवाब शायद जीते जी हर किसी को नही मिलता | ऐसा ही एक सवाल का अनुभव मेरे भी साथ हो गया | जिसे आपके साथ शेअर करना चाहता हु | एक दिन बड़े ही महत्वपूर्ण काम से हम चार लोग एक मित्र की कार से जिल्हे के SP से मिलने जा रहे थे | हमारे साथ जो व्यक्ति बैठे थे उनको SP साहब ने नौता देकर बुलाया था | शहर की सीमा पर पुलिस चौकी थी गाड़ी को रोक दिया गया | गाड़ी की पूरी चेकिंग की गई सभी कागज देखे गए | इतने में सामने से एक पुलिसे की गाड़ी आ गई जिसमे 6 पुलिस कर्मी बैठे थे सभी उतर गए और गाड़ी में बैठे लोगो से पूछताछ करने लगे | फिर से एकबार कागजात देखे गए | गाड़ी एकदम नई साल भर पहले खरीदी गई थी और सभी कागज भी पुरे थे | पुलिस के आला अधिकारी ने कहा गाड़ी में 4 लोग बैठे है इसलिए गाड़ी चालान होगी क्यों की कोरोना में गाड़ी में केवल 3 लोग ही यात्रा कर सकते है | नियम सही थे | हमारे साथ गाड़ी बैठे साहब बड़े शांत भाव से सब देख रहे थे सुन रहे थे | हमें कुछ न कहने के लिए उन्होंने आदेशित किया हम सब गाड़ी के निचे उतर गए | पुलिस अधिकारी ने कहा आपको चालान भरना होगा या कुछ ले देकर केस को निपटाना होगा | साहब ने चालान की राशी पूछी तो पुलिस अधिकारी ने २३००/- रुपये कहा तो साहब ने अपने जेब से एक हात में २३०० /- रुपये निकले और दुसरे हात में १००० /- रुपये निकले | पुलिस अधिकारी से कहा अब आपको चुनाव करना है की आपको कोनसी राशी लेनी है | उस पुलिस अधिकारी ने १०००/- रुपये लिए और हमें जाने के लिए कहा | मुझसे रहा नही गया और मै उन सभी पुलिस कर्मीयो के सामने साहब के पाव छु गया यकायक मेरे मुह से केवल ये शब्द निकले महाराज आप धन्य है | यह नजारा सभी बड़े ही गौर से देख रहे थे | सभी पुलिसवालो को ये समझ ही नही आ रहा था की ऐसा क्या हो गया | थोड़ी देर बाद उस पुलिसकर्मी ने मुझसे पूछा आप उन साहब के पैर क्यों पड़े ? मैंने उन्हें कोई जवाब नही दिया सब कुछ जानकर भी वो साहब ने पैसे दिए | एक फोन SP साहब को लगाते तो वही पुलिस हमे बड़े आदर के साथ साहब के बंगले तक पहोचाती और अपने लिए अच्छा बताने के लिए कहती | यदी एक 7 सीटर गाड़ी में कोरोना नियम के चलते 4 लोग नही जा सकते वहा पुलिस के 6 लोग अपनी नौकरी कर रहे थे | यदी पुलिस वाहन का चालान काट देती तो गाड़ी के नंबर से वो कोण साहब थे इसका कभी जीवन में उन पुलिस अधिकारी को पता लग सकता था | मगर कभी भी जीवन में उन्हें ये पता नही लगेगा की वो व्यक्ति कोण था जिसने दोनों पर्याय रखे थे जिसमे एक इमानदारी का था और एक बेईमानी था | साहब तो दोनों के लिए तैयार थे निर्णय पुलिसकर्मी को लेना था | जो की अपने जीवन में गलत था तो उसने गलत ही पर्याय चुना | अब पूर्ण जीवन भर वो हमेशा यही सोचेगा की उस आदमी ने दोनों हाथो में पैसे क्यों रखे थे ? दूसरा इन्सान उस आदमी के पैर क्यों पड़ा ? मेरे मुख से ऐसे शब्द क्यों निकले ? वो चार लोग कोण थे ? कहा से आये थे ? कहा जा रहे थे ? एक बात तो तय है जब भी कभी उस पुलिसकर्मी के साथ कुछ भी गलत होता है तो वो यही सोचेगा जीवन में मैंने जो गलत काम किये है ये उनकी ही देन है | और हमेशा साहब को याद करेगा | www.vinoddahare.blogspot.com

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